Tuesday, February 14, 2012

छोटू उस्ताद

जी सही समझे आप ....आज मिलवा रही हूँ अपने छोटू उस्ताद से ..

अभी तो जस्ट शुरूआत है..देखिए आगे-आगे करते हैं क्या ----

 


 नीले पुलोवर वाला लड़का

पुराने नीले पुलोवर-वाला,
वह लड़का उछलता कूदता,
सड़क पर शोर मचाता,
भागा जाता था, खुशी के मारे|

मैंने उसे रोका और टोका,
"क्यों, क्या हुआ? इतने खुश क्यों हो?"
उसने एक पांच का सिक्का निकाला,
और बोला "मुझे ये सड़क पर मिला!"
ऊपर उठाया सिक्के को,
सूरज की रोशनी में वो झिलमिलाया|

"और तुम इसका क्या करोगे,
ओ, नीले-पुलोवर-वाले छोटू बाबू?"

"मैं...मैं खरीदूंगा, खरीदूंगा
अपनी बेल्ट की बकल!"
पतला लड़का वह, समझदार है...
बकल खरीदेगा...
और वह दौड़-भागा, हँसते खिलखिलाते,
सिक्का वह उसकी गर्म मुट्ठी में कसकर बंद...

जो मैंने खोया था कुछ वक़्त गए,
था ये सिक्का वही,
मगर बेहतर उस नीले-पुलोवर वाले
लड़के के पास ही!

(रस्किन बौंड की कविता 'अ बॉय इन अ ब्लू पुलोवर' का हिन्दी अनुवाद)
अनुवादक - अनुभव प्रिय

Thursday, February 9, 2012

समारोह 3-- गणेश पूजा और हल्दी..

गणेश पूजा और हल्दी की रस्म हुई 18 को....
इस गीत को सुनते हुए स्लाईड देखिये और आशीष दें आपका भी दोनों बच्चों को .... पिछली पोस्ट में शिकायत मिली थी कि कुछ लोग स्लाईड नहीं देख पा रहे ....तो नया तरीका इस्तेमाल किया है भारतीय एक्सपर्ट का ....

Saturday, February 4, 2012

समारोह 2-- संगीत SSSS



 शादी के समारोह में 17 जनवरी को हुआ संगीत......जिसमें ऐसा कोई न बचा जो झूमा न हो .















 और अब आपकी बारी है ......शुरू किजिये गीत ......और झूमिए साथ-साथ.......
 1-
 

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3-


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5-

 रिश्तों का मधुर मिलन ---
विशेष नोट:- कनाडा चलाने मे व्यस्त समीर जी कि मदद से ये स्लाईड शो चल पाया ...थैंक्स......और भारत मे मदद की पदमसिंह जी ने (सुझाव भी इन्हीं का था -स्पेशल थैंक्स)..







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Tuesday, January 31, 2012

समारोह शुरू.....1- मेंहंदी......


सबसे पहले हुई मेंहंदी की रस्म... पल्लवी की......16 जनवरी....गीत सुनते जाईये और आप भी शामिल हो जाईये..

१ -
 
 २-

 ३-


       
           







Sunday, January 29, 2012

मुनिया का बचपन

---माँ........माँ .....देखो न !! इस मोटे कालू को समझा लो .........मुझे कुछ भी कह कर बुलाते रहता है..उं..हूं....उं....
---अपनी माँ से कहा रोते-रोते मुनिया ने...
माँ ---अरे!! ऐसे कोई चिढ़ता है क्या ?? तू भी तो उसे मोटा,कालू कह रही है ....
---मगर माँ मै तो उसे वही कहती हूँ जो वो है ....और वो मुझे वो कहकर चिढ़ाता है जो मैं नहीं हूँ ..
ऐसा भला कैसे??? माँ का सवाल था ।
--माँ देखो !! वो मुझे मोटी कहता है, मैं मोटी नहीं हूँ न ?.....हँस दी थी माँ ...

--तो ये तो वो आज थोडे़ ही न कह रहा है पहले भी कहता रहा है ..दोस्त है तेरा,  दोस्त की बात का बुरा नहीं मानते...
...समय के थपेड़ों से बच्ची बन चुकी अपनी पचास वर्षीया बेटी मुनिया का सर अपनी गोदी में रख बालों को सहलाते हुए तिहत्तर वर्षीय माँ समझा रही थी..... 

मुनिया का कहना जारी रहा---- वो अब मुझे "देवी" कहता है ....क्या मैं देवी हूँ ? माँ तुम तो कहती हो सब कुछ देवी की ईच्छा से होता है ....क्या सब कुछ मेरी ईच्छा से हुआ है ? माँ अब चुप थी .....


..और मुनिया ..........फ़िर पीछे दौड़ पड़ी थी अपने दोस्त को कालूउउउउउउ मोटेऎऎऎऎऎ कहते हुए............

बचपन में जीना और बचपन को जीना सीख लिया था मुनिया ने ..........

Tuesday, January 10, 2012

हर खुशी हो वहाँ तू जहाँ भी रहे

                                        पल्लवी और नेहा--------------एक गीत तुम्हारे लिये-------
अनुराग जी की मदद से ऑडियो तो हासिल कर लिया पर तंग आ गई इसका ऑडियो नहीं बजने को तैयार हुआ डिव शेअर मुझसे रूठा है आपको सुनाए तो सुन लेना --यहाँ --http://www.divshare.com/download/16542726-2d6
              
मगर ये उसे पसन्द आ गया शायद ---
(राजेन्द्र स्वर्णकार जी कि एक रचना)

 


और ये गीत तुम सबके लिये -----

                 

Tuesday, January 3, 2012

क्या कहना !!!

( Autoplay करना चाहा था ,नहीं कर पाई ..अब प्लेयर खुद चलाना होगा )...:-)