Sunday, March 9, 2014

जोगी और सा रा रा रा ......

सभी से क्षमा याचना सहित .....और अफसोस भी है कि किसी के ब्लॉग की
लिंक नही लगा पा रही हूँ अभी .मौका मिलते ही एडिट कर लूँगी.....
जो कुछ भी लिखा इनके स्टेटस पढ़कर ही जाना .......

गिरिजेश राव -

स्टेटस लगाए शनि को
व्यंग्य बाणों से अचूक
काल के यात्री हैं सनातन
पढ़ते इनको रह कर मूक ......

......जोगीरा सा रा रा रा

समीरलाल जी -

तश्तरी जाने कहाँ लुकाई
भागमभाग और हाथापाई
बड़के ब्लॉगर अब तो बोल
छुपे-छुपे ही खोल दे पोल........

...जोगीरा सा रा रा रा .............

अमित श्रीवास्तव जी -

"बस यूं ही" कहता जाकर
खुश होता डिश वाशर पाकर
निवेदिता संग जम गयी जोड़ी
किस्मत इनकी तगड़ी-चौड़ी....

......जोगीरा सा रा रा रा

अनूप शुक्ला जी -

बालकनी में चाय पिलाते
सूरज को पकड़-पकड़ बतियाते
बड़े फुरसतिया है अनूप
मोटे हो रहे हैं अभी खूब....

जोगीरा सा रा रा रा .........

वाणी गीत जी और अली भाई -

बड़े प्यार से करे खिंचाई
वाणी गीत और अली भाई
चुभा -चुभा कर सुई लगाते
बिना बुलाए कहीं न जाते ..........

.....जोगीरा सा रा रा रा .......

देवेन्द्र पाण्डेय जी -

इनके पास अमन और चैन
जाने क्यूँ फिर भी रहते "बेचैन "
चित्रों से ये है रिझाते
गीत इनके हम है गाते

...जोगीरा सा रा रा रा .....

अनुलता -

प्रेम की बोली इसकी पहचान
लड़ती मुझसे चढ़ा कमान
दिल निकाल कर ये दे जाती
मेरी छोटी बहन कहलाती.......
<3

....जोगीरा सा रा रा रा .....

शिवम्  -

शिवम है मेरा छोटा भाई
इसके रहते आंच न आई
देश की चिंता इसे सताती
"बुरा-भला" में श्रद्धा पाती

...जोगीरा सा रा रा रा ............

रचना बजाज-

छोटी छुरी ,करती गहरे घाव
कम शब्दों  में भरती पूरे भाव
मुश्किल है इससे किसी का बचना
ऐसी है छोटी बहन रचना .......(बजाज)...

......जोगीरा सा रा रा रा .......

देव कुमार झा

आदि बाबा की सेवा करते
मनीषा के गुस्से से डरते
थोड़ा रूको ओ देव बाबू
बाबा नचाएंगे हो बेकाबू.......

......जोगीरा सा रा रा रा ........

अजय कुमार झा

कोर्ट कचहरी का हो काम
अज्जू देते उनको अंजाम
गोलू-बुलबुल इनकी जान
ख़ास "ईsssश्टाईल"इनकी पहचान........

.......जोगीरा सा रा रा रा ....

गौतम राजरिशी जी

इनको करते हम प्रणाम ,खुद सर झुकता लेते नाम
बुद्ध नही पर गौतम है ,स्नेह नहीं इनसे कम है
सरहद पर रहते तैनात हर मौसम,दिन हो या रात
ग़ज़लों के ये कारीगर, दिल देता आशीष भर-भर..........

......जोगीरा सा रा रा रा .........

काजल कुमार जी

इनकी कूँची देखके ,होती नहीं हैरानी
इनके आगे पानी भरती ,अच्छे अच्छों की नानी
नियत समय पर सोते उठते अपने काजल भाई
लेट कभी ना होता वो जिसने इनसे घड़ी मिलाई .......

....जोगीरा सा रा रा रा ...........

अविनाशचन्द्र

भोला चेहरा स्फूर्त दिमाग
समय की कमी से रूका है ब्लॉग
कविता इनकी तोड़े तन्द्रा
विनम्र है बाबू अविनाशचन्द्र

.....जोगीरा सा रा रा रा ......

बी.एस.पाबला जी

डिग्री नहीं पर डॉक्टर हैं
अच्छे अच्छों के मास्टर हैं
जैसी काया वैसे धीर-गंभीर
ब्लॉगर सरदार हैं मेरे वीर......

....जोगीरा सा रा रा रा .........

ललित शर्मा जी

पुरातत्व का शौक हैं रखते, जंगल -जंगल छान मारते
नई जगह की सैर कराते तस्वीरें भी हमें दिखाते
बिना शुगर के खाते कंद,रहते हरदम मस्त -मलंग
चार आँखों संग तगड़ी मूंछ, रखते स्वामी ललितानंद

....जोगीरा सा रा रा रा ......

अरविन्द मिश्रा जी

प्रेम भाव से भरे अनोखे करते ये विज्ञान प्रसार
तनी हुई रस्सी पर चलते ले हाथों नंगी तलवार
ब्लॉग जगत में कोई नही,जो यूं ही दे इनको बिसरा
हाँ, हाँ, ठीक तो पहचाना-वही अपने अरविन्द मिश्रा....

......जोगीरा सा रा रा रा रा .............

सतीश सक्सेना जी

हंसते ,रोते और ठुनकते जब देखो तब इनके गीत
तेरे-मेरे ,इसके-उसके सबके प्यारे इनके गीत
सरदी ,गरमी ,बरखा  लाते ,जैसा मौसम  वैसे गीत
बड़े ही नाजुक,कोमल,सुन्दर और संवेदन इनके गीत.....

.......जोगीरा सा रा रा रा रा..........

आशीष राय जी

बगिया इनकी रंग-बिरंगी फूल खिले हर क्यारी-क्यारी
करते लेखन सौन्दर्य वाला ,या फिर लिखते ये बधशाला
बड़े घुमक्कड़ आशीष राय,एक पैर कलकत्ता तो एक दिल्ली टिकाय
कविता इनकी मन को भाय ,पर समझे वही जो डिक्शनरी लाय...

...जोगीरा सा रा रा रा .........

शेफाली पाण्डेय (मास्टरनी)जी

ट्वीटर,फेसबुक,और व्हाट्स एप्प पर ही
खेल ली होली,दे दी बधाई
बिना गुझिया ही "मास्टरनी" जी ने
सबको बुद्धू बना अपनी "दीवाल" रंगाई........

....जोगीरा सा रा रा रा ........

ताऊ (मुद्गल जी)--

इनको कोई जान न पाया
बड़ी अनोखी इनकी माया
प्यार ये अपना देते बाँट
फिर ताई से खाते डांट
देते हैं ये सबको झांसा
बड़े-बड़ों को इन्होंने फांसा
लट्ठ लेकर घूमती ताई
इनको अब तक पकड़ न पाई
स्वभाव से हैं ये बिलकुल काऊ
नही पहचाना?,अरे! हमारे ताऊ............

....जोगीरा सा रा रा रा .............

गिरीश पंकज जी

रचनाओं में इनकी दम
मिलनसार हैं, वजन है कम
नाम गिरीश "पंकज"हैं लिखते
मिलकर पंकज जैसे ही खिलते

.....जोगीरा सा रा रा रा ...........

निवेदिता 

"निवेदिता" को रही शिकायत,नाम "अमित" का नहीं लिया
मस्त लगा तो मस्त कहा था, पर अपना मुंह फुला दिया
जोड़ी तुम्हारी इतनी प्यारी कुछ कहते न बनता है
झूठ कहूं तो पूछो किसी से गवाह सारी जनता है
आज है होली रंगों वाली खेलो चाहे जितना खेल
भूल के गुस्सा रंग लगाओ ,खुश हो जाओ कर लो मेल........

.....जोगीरा सा रा रा रा रा ...........

वाणी गीत

",वाणी " की जो सुन ले बानी
मिलता उसको "ज्ञान" भरपूर
सुबह-सबेरे चाय पर मिलती
नहीं रहती वो मुझसे दूर
घर के काम काज करने
हो जाती फिर झट से फुर्र..........

........जोगीरा सा रा रा रा रा .........

अनुराग शर्मा

सबसे अनुराग रखते हैं ये शर्मा
ब्लॉग जगत के पहुंचे हुए कर्मा 
विषयों के अद्भुत हैं जानकार
रहते हरदम मदद को तैयार
पिट्सबर्ग से देते आवाज
कई ब्लॉगों पर करते काज ......

.....जोगीरा सा रा रा रा रा .........

रमाकांत जी

सीमित साधनों में हैं देते, नन्हें बच्चों को बढ़ावा
ऐसे मंदिर के ये पुजारी, जिसमें आता नही चढ़ावा
नही कोई ये धर्म गुरू पर देते हैं ये दीक्षा
बड़े भैया रमाकांत जी ,कर्म है इनका शिक्षा

.....जोगीरा सा रा रा रा रा ......

सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी

साँस रोक कर रखिये कुछ अद्भुत बताने वाले हैं जन हितार्थ
हाँ,सरकार किसकी बनेगी ?ये बताएंगे हमारे ख्यात जोशी सिद्धार्थ.........

......जोगीरा सा रा रा रा ...........
(संजय अनेजा जी का कमेन्ट पढ़कर प्रेरणा मिली)........:-D

Saturday, March 8, 2014

स्त्री....

नहीं तुम नहीं डरना
अन्धकार से
वही करना जो तुम चाहो
पूर्ण अधिकार से

सम्मान देकर
सम्मान ही पाना
राह के रोड़े
ठोकर से हटाना

उजाला करेंगे
मिलकर के सारे
आत्मविश्वासी जुगनू
बनाकर कतारें

चाँद-सूरज साथ
जब न होंगे तुम्हारे
अँधेरे में रोशन होंगे
तुम्हारे सितारे...............
-अर्चना

Wednesday, February 26, 2014

रिश्तों का दलदल...

आज निवेदिता ने फ़ेसबुक पर कुछ पंक्तियाँ लिखी -

"अजीब सी है
ये रिश्तों की
गहराती दलदल
आओ डूब कर
कहीं दूर मिल जायें "…… निवेदिता

 
पढ़कर मेरे मन में जो आया वो उसके कमेंट में लिखा -
"चलना मुश्किल है
इस दलदल में
एक-दूजे क स
आओ मिलकर

इनमें डूब जाएं" .....अर्चना
 

......निवेदिता से कहा- "मेरी पंक्तियों के बाद तुम्हारी पढ़ने में अच्छा लग रहा है ...आगे बढ़ाओ इसे" ..और कुछ समय बाद ही उनकी ब्लॉग पोस्ट तैयार होने की खबर मिल गई ... सोचती रही मैं उसके बाद भी मन में उथल-पुथल होती रही...और ये लिखा मैंने ---
 

 "रिश्तों का दलदल"
सोंधी सी महक
भर दें
सबके मन में
आओ बदरिया बन
एहसासों की बूँदे
हम बरसाएँ......

प्यास न रहे
बाकी
किसी की
सबके होठों पर
प्रेम की अम-रसिया
हम छलकाएँ......

नमीं न हो
आँखों में
किसी की
आओ हौले से
गोद में ले
सिर सहलाएँ......

एहसासों की बूँदे..
प्रेम की अम-रसिया..
और असीम स्नेह के साथ..
इनकी गहरी अनुभूती ..
कोई शक नहीं कि
हम रिश्तों के
दलदल में फ़ँस जाएँ.....
-अर्चना ....


और ये सब सुनना हो तो यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं---


Wednesday, February 19, 2014

मेरे मन की (१) - "जिन्दगी"

नमस्कार, कोशिश की है- कुछ नया करने और जीवन में मधुरता घोलने की..... 
सुनियेगा और कैसा लगा बताईयेगा...
 

1)
ज़िन्दगी एक सहेली जो कभी कभी पहेली बन जाती है/ सताती है.. 
जीना दूभर कर देती है फिर भी भाती है/
हर पल जीने का नित नया पाठ पढ़ाती है/ 
ज़िन्दगी के पीछे मैं और मेरे पीछे मौत भागती है/ 
 -मीनाक्षी
गीत- ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाय ...
फ़िल्म: आनन्द/ आवाज- मन्नाडे /संगीत:सलिल चौधरी


2)
चलो, कुछ दूर साथ चलें, बैठें, बतियायें, हँसें और जी लें....
जिन्दगी नाम फक’त चंद सांसों का आना जाना तो नहीं...
-समीर लाल ’समीर’
गीत- जिन्दगी जब भी तेरी बज्म में लाती है हमें ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें सूर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें दिन ढले यूँ तेरी आवाज़ बुलाती है हमें ..  
फ़िल्म:उमराव जान/गीतकार:शहरयार/आवाज:तलत अजीज/ संगीत: खय्याम
३)
बच रहा था आप सबसे कल तलक सहमा हुआ
अब बड़ा महफूज़ हूँ मैं कब्र में आने के बाद

मौत का अब डर भी यारों हो गया काफूर है
ज़िंदगी की बात ही क्या ज़िंदगी जाने के बाद
-अनुराग.
गीत का मुखडा:
ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें, ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें
(फिल्म: उमराव जान - संगीत खय्याम)

                                                        
४)
"जिन्दगी" भर हमें बस रुलाते  रहे
वो न आये कभी हम बुलाते रहे.
आँसुओं से लिखी है मेरी दास्ताँ
लोग सुनते रहे हम सुनाते रहे.

-गिरीश पंकज 
मेरी पसंद की  लाइन है... ''मै ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया''

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अगले प्रोग्राम के लिए शब्द है - "पल"
कमेंट में अपनी पंक्तियाँ (सिर्फ़ दो या चार) लिखें व साथ ही लिखें अपनी पसन्द के गीत का मुखड़ा और फ़िल्म का नाम...

Saturday, February 15, 2014

देने वाला - श्री भगवान

मुझसे गीत सुनाने की उम्मीद मत करना
आवाज तो तुमने भी ईश्वर से पाई है...
आँखें भी हो चुकीं होंगी बूढ़ी
पर दे देना किसी को कि
इनमें गज़ब की रोशनाई है....
इन होंठों  से मुस्कुरानें की आदत तुम लेना
इसे लेने की नही मनाई है
क्यों कि मेरे होंठ तब भी मुस्कुराएं हैं
जब मैनें दुश्मनों से भी नजर मिलाई है ......

Friday, February 14, 2014

अभिशप्त-प्रेम

प्रेम
सिर्फ ढाई अक्षर नही,
प्रेम नही समाता किसी
हायकू
त्रिवेणी
दोहा,सोरठा
या छंद में
..
प्रेम के लिए
लिखे जाएं यदि
ग्रन्थ
पुराण..

या महाकाव्य
रचे जाएं
तब भी
अधूरा ही
रहा है,
रहता है,
रहेगा प्रेम
प और म
के बीच के
आधे र की तरह....

शायद अभिशप्त है
रति से.....
प=प्रथम
म=मिलन........

-अर्चना(14/02/2014)

Sunday, February 9, 2014

मिलिए फेसबुकी अर्चना से ......

कई दिनों से लिखे जा रही हूँ , जब जैसा भाव हुआ वैसा ......कभी किसी को पढ़ने के बाद तो कभी पहले .......इकठ्ठा कर लिया सब यहाँ ,अब साथ पढने को ........

उड़ने को नही पंख
मगर उड़ती हूँ बहुत मैं
चिड़िया या कोई पंछी नही
कि किसी कैद में रहूं ......

बाजुएँ मेरी काट दी जाएं फिर भी तुझे भींच लूंगी
जिजीविषा है मुझमें इतनी कि मौत से भी जीत लूंगी .......

इन्सानियत का कोई रंग अगर होता
तो गोरा और काला तो न होता आदमी
प्यार और विश्वास जो दिल में घुला रहता
तो बार-बार यूँ न रंग बदलता आदमी...

मन को लगाकर पंख भरो ऊँची उड़ान
सूरज से हाथ मिलाकर भर लो मुट्ठी में आसमान ..........

पता नहीं कहाँ आंचल फंसा है मेरा
कि आगे चल ही नहीं पाती
जाने कौनसी झाड़ी है कांटो वाली
या कि बस उसने पकड़ रखा है.....

झाँक कर देखो जरा अपने अन्दर तुम
मिलूँगी मैं तुम्हें वहीं कहीं गुमसुम...

जब इन्सान जिंदगी के पीछे भागता है, तो जिंदगी उसे मार देती है...
जब इन्सान रोज मरकर भी जीता है, जिन्दगी उसके करीब आने लगती है...
और जब वो हर पल मरकर जिंदगी को जीने लगता है जिंदगी उसकी हो जाती है ...:-)