Saturday, January 22, 2011

एक -----(बीप) से प्रेरणा --

आगे बढ़ते रहो कि "जहां" तुम्हारा है ,
रत्न गढ़ते रहो कि "जहां" तुम्हारा है,
तन और मन की हो जुगलबंदी ऐसी --
कि हर कोई तुमसे पूछे  -- " "जहां" तुम्हारा है" ?




-

9 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut achchi baat kahi aapne

संजय भास्कर said...

तन और मन की हो जुगलबंदी ऐसी --
कि हर कोई तुमसे पूछे -- " "जहां" तुम्हारा है" ?
......ला-जवाब" जबर्दस्त!!

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत खूब, दमदार।

Kailash C Sharma said...

तन और मन की हो जुगलबंदी ऐसी --
कि हर कोई तुमसे पूछे -- " "जहां" तुम्हारा है" ?

बहुत सुन्दर....

amit-nivedita said...

nice and meaningful lines.

Minakshi Pant said...

सार्थक रचना !

राज भाटिय़ा said...

अति सुंदर जी धन्यवाद

Mithilesh dubey said...

कहा है ????????????????

संजय @ मो सम कौन ? said...

हमारा सवाल - ’कहाँ’ हमारा है?