न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
Monday, July 9, 2012
याद- पुरानी यादों की गठरी से ...
राकेश खंडेलवाल जी का गीत-- फ़ूलों की पाखुर से .........उनके ब्लॉग "गीतकार की कलम" से
7 comments:
आपने राकेश खंडेलवाल जी के फूलों के पांखुर से को बड़े ही मनोयोग से खूबसूरती से गाया ,
सुन्दर शब्दों का संयोजन और भाव .
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १०/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आप सादर आमंत्रित हैं |
kal sure sununga:)
सुन्दर प्रयास...
सुंदर चयन।
जितनी सुंदर कविता उतनी ही सुंदर प्रस्तुति ।
बहुत सुंदर आवाज़ ....और भावपूर्ण भी ....
दिल को छूती हुई ....
Post a Comment