Friday, June 26, 2009

काश कि वह छिप पाता !!!!!

हम सबके जीवन में कई बार ऐसा कुछ घटता है कि , हम समझ ही नही पाते कि--- ऐसा हुआ तो हुआ ही क्यों??? कैसे??? और---
सब-कुछ अच्छा होते- होते अचानक ही सब- कुछ बदल जाता है---और ऐसा जब हमारे आसपास बार-बारहोता है तो इस तरह की कविता का होना स्वभाविक है-----

"
इस बार ईश्वर ने फ़िर ऐसा खेल खेला---
कि जिसने देखा,वो सिहर गया था
और फ़िर पासा पलट गया---
शायद शकुनी ने फ़ेंका था
उससे सब कुछ छिन गया---
जिसने अभी हाथों में भी पकडा था
हम चाहें भी तो कुछ नहीं कर पा रहे हैं---
शायद ईश्वर ने उसे अच्छा बनते देख लिया था "


2 comments:

राज भाटिय़ा said...

कई बार ऎसा भी कुछ हो जाता है, जो हम ने सोचा भी ना हो.

vatsal said...

kiske liye?