Monday, February 28, 2011

आओ ...बस दो पल....साथ बैठें...

चलो कुछ ऐसा याद करें कि- दिल खुश हो जाए
बीती हुई कोई बात करें कि- दिल खुश हो जाए
जब हम छोटे थे तो मस्ती और खुशी
हमारे ही साथ रहते थे
मुस्कान और हँसी के झरने
हमारे आसपास ही बहते थे
दु:खों का तो कोई नाम न था
हमको भी उनसे कोई काम न था
चलो कुछ ऐसा याद करें कि-खुशियाँ कम न हो 
दो पल बैठ बीती बात करें-जिसमें कोई गम न हो....

9 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

sabhi panktiyan dil ko CHHUTI HUI

प्रवीण पाण्डेय said...

ऐसे पल की करूँ प्रतीक्षा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

दिल ढूँढता है फिर वही फुरसत के चार पल।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, धन्यवाद

Vinayak Dubey said...

khoobsoorat rachna...
mera bachpana abhi baaki hai :)..lekin fir bhi wo shuddh aur pyara... khushnuma bachpan yaad dila diya aapne. shukriyaaa. :)

सम्वेदना के स्वर said...

बचपन के दिन भी क्या दिन थे
उड़ते फिरते तितली बन!!

amrendra "amar" said...

चलो कुछ ऐसा याद करें कि- दिल खुश हो जाए
बीती हुई कोई बात करें कि- दिल खुश हो जाए

बहुत सुंदर, धन्यवाद..........

Kajal Kumar said...

वाह एक सुंदर रचना.

vijaymaudgill said...

दो पल बैठ बीती बात करें-जिसमें कोई गम न हो....

sach main is daur main insaan bas yahi chahta hai.

accha likha