Wednesday, September 14, 2011

यही है जिंदगी..


गम को पीना हमको भाया
अब यही हमारा काम
आओ मिलकर इसे बाँट लें
जीना इसी का नाम ..

9 comments:

केवल राम : said...

सुख बाँटने से बढ़ता है और दुःख बांटने से कम होता है ......अब निर्णय हमारा है कि क्या करना है ?

प्रवीण पाण्डेय said...

भले भी दिन आते जगत में बुरे भी दिन आते।

अभिषेक मिश्र said...

वाकई जीना इसी का नाम.

संजय भास्कर said...

जीना इसी का नाम

रश्मि प्रभा... said...

हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार,
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार,
जीना इसी का नाम है!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को शूल।।
--
हिन्दी दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

गम को खुशी में बदल दो।

sanjeev said...

gum ko tum n piya karo,
gum ko tum galat kiya karo,
gum galat karne,gamgeeno me tum sukh banto,
ek saath prayas to karna hi hai,
per ab kuchh apne-apne,tariko se alag-alag bhi in gum ke badlo ko chhanto,