Thursday, July 6, 2017

अहा! #हिन्दी_ब्लॉगिंग

टिप्पणी न आना कोई विशेष कारण नहीं लगता ब्लॉगिंग कम होने का,वो तो आज भी उतनी ही आ रही होंगी ...
हमारा आपसी संपर्क टूटना एक महत्वपूर्ण कारण था ,हमारीवाणी, चिट्ठाजगत से हमें बाकी ब्लॉगों तक पहुंचने में सुविधा होती थी,हालांकि मैं कई नए ब्लॉगों तक पहुँची, टिप्पणियों से होकर भी...मेरी ब्लॉगिंग में कम पोस्ट का आना अति व्यस्तता के बाद भी जारी था , याद आता है 2012 में जब बच्चों की शादी की तारीख तक मैंने पोस्ट लिखी,लेकिन अप्रत्याशित अनहोनी ने मुझे पंगु कर दिया और उसके बाद से अतिव्यस्तता रही,नेट,कम्प्यूटर की अनुपलब्धि भी एक कारण रहा। लेकिन फिर भी ब्लॉगिंग ने मुझे जो दिया वो असम्भव था ब्लॉगिंग बिना पाना ।

याद है चेटिंग का वो दौर जब सामने से किसी का जबाब आते घर के सब जमा हो जाते पास कि अरे देखो बात हो रही है ...
सबसे पहले छोटी बहन रचना से ब्लॉगिंग के बारे में सुना,वो कब और कैसे लिखने लगी ये बताने के साथ ही उन्मुक्त,समीरलाल,अनूप शुक्ल जी के नामों से परिचय हुआ ...उन्मुक्त जी में तो मुझे मेरे पिता की छवि ही दिखती है,वैसी ही समझाईश और सलाह उनके चिट्ठे पर मिलती है सदा...समीरलाल मेरे मित्र बने ऐसे लगता है जैसे हम एक क्लास के सहपाठी हों ,खूब होमवर्क करवाया उन्होंने हम दोनों बहनों से हमको बिना बताए ... :-)
दिलीप और दीपक से स्नेहाशीष के साथ बात होती थी,उनका माँजी और मासी कहने के साथ परिवार में शामिल होना, आज सबको सुनकर आश्चर्य लग सकता है, बात भले साल में एक या दो बार बात हो रिश्ता बरकरार है।
जब मेरा परिचय सलिल भैया से हुआ तो जो बच्चे उनके संपर्क में पहले आते मुझे बुआ कहने लगे ....
और एक खास बात जितने रिश्ते बने उनपर हक भी उतना ही जताते हैं हम उस दौर के ब्लॉगर...
भाई, बहन,चाचा,सखा,मित्र के साथ यहाँ पिता और माता भी मिले....

जब वीडियो चेट सीखा, गिरीश बिल्लोरे जी के परिवार के साथ शाम के कई डिनर वीडियो चेट पर किए....जब रूपचंद्र शास्त्री जी के साथ बात हुई तो उनके यहां  सिद्धेश्वर जी के ब्लॉग से पहले उनसे नमस्ते हुई थी ....
रिकार्डिंग को ब्लॉग पर पोस्ट करना सिखाया सागर नाहर जी ने esnip का पाठ विस्तृत समझाकर मेल में ...तब विधिवत शुरुआत हुई पॉडकास्टिंग की
पॉडकास्ट बनाते समय हुए परिचय के साथ ही खूबसूरत रिश्ते बनते चले गए ...
अनुराग शर्मा जी ,सलिल भैया और ठाकुर पद्मसिंग जी के साथ पॉडकास्ट की तगड़ी टीम आज भी बनी हुई है ..
आपस में मिले बगैर -
दिलीप का मैसूर में मेरे कहने पर मेरे भाई की बेटी के जन्मदिन पर  उपहार लेकर जाना और मेरी उपस्थिति दर्ज करना, यहाँ दीपक की माताजी से बात करना,गिरीश बिल्लोरे जी का मेरी खो खो टीम के लिए बीच रास्ते में जबलपुर में डिनर पैकेट पहुंचाना,
मेरा प्रवीण पांडेय जी के यहां सुबह की ट्रेन पकड़ने के लिए पहली बार मिलने पर ही रात रुकने का आग्रह और दीपक का सफर से रात देर तक घर न पहुंच पाने  पर मेरा भतीजी के साथ इंतजार करना ,रायपुर में ललित शर्मा जी का बाईक पर लेने आना बाकी ब्लॉगरों से मुलाकात के लिए ...जैसी घटनाएं ब्लॉगिंग की बनिस्बत ही घटी ...
जिनके लिए अलग से ब्लॉग पोस्ट लिखी जाए तो भी खत्म न हों ...

नमस्ते के साथ शुरू हुई बात आज भी 50% ब्लॉगरों के साथ जारी है ...  पहले कनिष्क के "ब्लॉगप्रहरी" पर भी उपस्थिति दर्ज रही उसमें चेट की सुविधा भी थी , खास बात mp3 फाईल का सीधे अपलोड होना लगता था मुझे ...
ब्लॉग सेतु पर आज भी प्रयोग करने का मन है ...

आज किसी को टैग नहीं किया... जिनके नामों का उल्लेख मैंने किया मेरी किसी न किसी ब्लॉग पोस्ट में वे और उनके ब्लॉग लिंकित हैं ,आप खोजिये और पहुंचिए उन तक ... यही ब्लॉगिंग की पहचान है .....

और भी बहुत कुछ बाकि है बताने को फिर कभी ....

6 comments:

Vivek Rastogi said...

ऐसे ही बहुत सारे अनुभव मेरे भी हैं, यह नयी जिंदगी है।

Kavita Rawat said...


सार्थक विश्लेषण ...

ताऊ रामपुरिया said...

सच है इतना अपनापन ब्लागिंग में ही पाया जा सकता है, बहुत शुभकामनाएं.
रामराम
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

आपने कैप्चा अभी तक नहीं हटाया? प्लीज हटा लिजीये.
सादर

अर्चना चावजी Archana Chaoji said...

सेटिंग में तो सब ठीक है ,समझ नहीं आया क्या करना है

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (07-07-2017) को "न दिमाग सोता है, न कलम" (चर्चा अंक-2659) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

vandana gupta said...

आपने सही कहा ब्लॉगिंग ने एक अनदेखे अनजाने बंधन में बाँधा है हम सबको और ये रिश्ते अटूट हैं