Sunday, January 7, 2018

सीमा प्रहरी

उन्हें बर्फ़ीली पहाड़ियों में भी गर्मी लगती है
और रेगिस्तान की गर्म हवाएं ठंडक पहुँचाती है
बरसाती बादल उन पर बिजली नहीं गिरा पाते
और उनके त्यौहार हमसे अलग होते हैं ....

परिवार उनका भी होता है पर हम -सा कमजोर नहीं
और ईमानदार मेहनती हैं वे,कामचोर नहीं
तुम्हारा बस नहीं कि तुम उन्हें पहचान भी पाओ
तुम तो बस- "बंदे में था दम" यही गीत गाओ!!!

-अर्चना

3 comments:

RADHA TIWARI said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (08-01-2018) को "बाहर हवा है खिड़कियों को पता रहता है" (चर्चा अंक-2842) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

नमन है इन वीरों को

Sudha Devrani said...

बहुत खूब....