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Sunday, December 6, 2015

ये बहुत आसान लगा मुझे -आप भी कर सकते है --किजीये कुछ नया---हर दिन...

एक प्रयोग ये भी ---पहली बार किया है ,तकनिकी जानकारी बढने के बाद सुधार की गुंजाईश है.....अभी ये चलेगा न.....

Saturday, November 26, 2011

फ़ल और परिवार ...

आज कहीं पढ़ी एक बात याद आ रही है ...फ़लों को लेकर उदाहरण था, तुलना की गई थी परिवार की फ़लों की बनावट के साथ...ठीक से तो याद नहीं शायद पर कुछ नोट कर लिया था वही लिख रही हूँ ..
(शायद आपमें से कई लोगों ने भी पढ़ा हो, जिसे पता हो वे कॄपया "ओरिजनल" की जानकारी देवें)


पारिवारिक संगठन
सेवफ़ल -- एक सुगठित फ़ल, अन्दर की बात बाहर आ जाये तो बदरंग ....

मौसम्बी -- एक विभाजित फ़ल, पर आपसी जुड़ाव बहुत ..

संतरा -- एक विभाजित फ़ल, पर ढीला ..

अंगूर -- सब अलग , कोई फ़र्क नहीं दिखने और स्वाद में एक से..

जामुन -- अलग -अलग पर रंग ऐसा जैसे जलते हों एक-दूसरे से..

बेर -- अलग-अलग और दूर-दूर काँटों से घिरे ..एक को छूने जाओ तो दूसरा काँटा चुभता है ...

और अन्त में ....

सीताफ़ल -- बाहर से भी अलग ,अन्दर से भी अलग पर जुड़ाव -- एक को छेड़ने पर सब बिखरते हैं ..मानसिक और शारिरिक रूप से स्वस्थ..अन्दर से भी बाहर से भी ......

अब आप तय कीजिए .....किस तरह का हो पारिवारिक संगठन ...



Monday, June 27, 2011

"Rooh - music from soul"...एक नया बेंड...

कमाल है !!!

                                                                (बैठे हुए बीच में - दिलेश्वर)
ये बच्चे भी कमाल कर देते है ...दिलेश्वर मेरे स्कूल मे  कल तक एक शैतान बच्चा था ....और आज....

बाकी साथियों से मिल सकते हैं यहाँ---

आपकी शुभकामनाएं दें , बेहतर भविष्य के लिए...


Friday, December 17, 2010

एक नजर इधर भी ------

आज यहाँ  देखें ....थोडा सोचें....
क्या करना है ....
कैसे करना है .....
क्यॊ करना है .....
जानने के लिये देखते रहिये ...
कोई जल्द बाजी नहीं ........................ये काम का मामला है ....

Friday, April 30, 2010

पिछले दिनो...........इन पन्नों पर ..................मैने पढ़ा.......

चंद लाईने .....जो मैने लिखी .......साथ दी गई लिन्क की कविताओं को पढकर........आप शायद आप भी कुछ लिखेंउन्हें पढकर ......... ........



हाँ---- दुख और आँसू.........
हाँ दुख सचमुच ही लहू को ठंडा कर देता है ,
तभी तो आँखें भर आती हैं ,
ओस की तरह ,
और ठंडा लहू जब रगों में दौडता है ,
आँसू जम जाते हैं आँखों में........मौन के खाली घर में ......


मेरे डसने के बाद आदमी जिन्दा नही बचता,
मगर तुम्हारे डसने के बाद तो,
जीते-जी ही- मरते रहता है ......एक साँप धीरे से जा बैठा ----

एक चमकीली... काली-काली कविता.........छोटी-छोटी बातें ...पर मैने पा ली कविता......... एक था काला......


हाए!!! मौला !!!
होश गँवाकर
ये क्या-
कर गया ???
इन्सान तो रस्ते पर आया नहीं
और
शैतान गुजर गया.................देखो न !!!!!!!! कब तक वो देखता ??????

Link
तडप-तडप के जी रहा अब,कि उसका अक्स भी बदल गया,
जला था सिर्फ़ वो,पर उसका सब कुछ झुलस गया........शबनमीं लू में................



आशा करती हू ------
हंसों के वे जोडे वापस आएंगे
रिश्तों के टूटे मोती भी साथ लाएंगे
गूंथेंगे माला
पहनाएंगे दादी को
सुनाएंगे कहानी
और याद करेंगे नानी को
खेलेंगे खेल और
सूने घर में भर देंगे शोर
निराश हों
होगी एक दिन फ़िर वही सुहानी भोर......जुडेगी फ़िर रिश्तों की डोर


मुझे याद करते ही हाजिर रहूंगी...
माँ हूँ तेरी---मुँह से कुछ कहूंगी.....


और अगर फ़िर भी बच जाए ,
तो बारिश मे भी लाएं,
हम जैसे नन्हे मुन्नों को,
इंद्रधनुष दिखलाएं..............सूरज से विवेक पूर्ण रिक्वेस्ट .............


जरूरतें होने लगती हैं
सपनों पर हावी
पर विश्वास
जिन्दा रखता है
सपनों को भावी....."
या
जरूरतें होने लगती है
हावी--- सपनो पर ...
और विश्वास जिन्दा रहता है
भावी सपनों पर .....विश्वास और सपने ---

Saturday, April 17, 2010

आप भी किसी की जान बचा सकते है .........(आओ पुण्य कमाएं).......

आज मेसेज मिला - मोबाइल पर -----क्या कोई डॉक्टर साहब (निशुल्क ) बताएंगे ???-------सही है या नहीं ??? इसे फारवर्ड करने से कोई फायदा हो सकता है ???-----किसी का ?????? .....यदि हां.....तो आप भी करें....... यदि ना तो , मै भी डिलीट करूँ .....................पढ़िए ...............

---अंग्रेजी में है -------(जिंदगी से जुडा मामला है "अर्थ का अनर्थ" न हो इसलिए ...(same to same)-------


"VERY IMP MSG"---

If U are Alone & Sudenly Get "CHEST PAIN" dat Radiates 2 Ur
Left arm , Up 2 Ur Jaw, den It May B "HEART ATTACK" If No one 2 Help & Hospital Is Far, den Dont Wait , U Help Urself --cough Repeatedly & Vigorously --Tek Deep Breath B4 Every Cough.
--Deep Breath Gets Oxygen 2 Lungs
--Coughing Keeps Blood Circulation Alive...

Pls Forward This As Much As U Can.

Who Knows One Day Ur Message 'll Save One's life.. kindness Costs Nothing..

Wednesday, April 14, 2010

पिछले पन्नों पर.......................


काश
सूरज
के इस दर्द को उसके दोस्त समझ पाते ....
और सूरज के साथ उसके जैसे ही , उससे दोस्ती निभाते ...
अब देखना सूरज अपने --पल-पल का बदला लेगा...
चाँद , रात और सितारों के सात हम सबको भी जला देगा.......दिल की कलम पर एक प्रेम कहानी ....बहुत पुरानीजरा हट के पर ... ...

आने वाले समय मे टी.वी. भी उठाकर फ़ेंक दिए जाएंगे........आज माता-पिता अपने बच्चों के लिए समय नही निकाल पाते तो भविष्य मे ये बच्चे ......ईश्वर आपके लिए क्या करे ........खुशदीप.....

साहिल की गोद में जब सूरज कर सो गया
सोने से पहले ही तमस ने उसका मुँह भी धो दिया...
तमस को बुलाया था रोशनी ने जान देकर
रोशनी को रोया चाँद ठंडी चादर लेकर...
चाँद को सहलाया समन्दर ने आगोश में लेकर
और तब सूरज चल पडा चाँद को सहिल की गोद देकर..... मै आप और सब ...........ओम आर्य के साथ............


राम नाम सत्य है ----

ये ब्लोगर बडा मस्त है,
ब्लोगिंग से त्रस्त है,
बुढापे का कष्ट है,
गूगल भी ध्वस्त है,
अन्य ब्लोगर पस्त है,
"ये" ही सर्वत्र है,
(क्योंकि इसमें)
आंतरिक युवत्व है ।...............समीर जी के लिए ........उडनतश्तरी पर............. (पोस्ट ढूंढ पाना मुश्किल )


इस पेशे की पहली शर्त अच्छा स्वभाव होना ही है .....(हालांकि ये समय बिताने के बाद ही पता चलता है )..........मुक्त विचारो का संगम ---कभी ख़ुशी कभी गम

अभी तो नाचना शुरू ही किया था ...............मारा क्यों???????????????
..........भला इतने लोगों के बीच में अच्छा लगता है क्या ??? ......


पिछले दिनों स्वादिष्ट संगीत का का रसास्वादन भी करवाया ...........मनीष जी ने


आज
आशीर्वाद दे ----मेरे पोते ---युगांश को-----

(मेरे ताउजी के बड़े बेटे के बेटे का बेटा मेरा पोता हुआ ना ....) उसके जन्मदिन पर-----(एक वर्ष का हुआ है आज )(पुरानी फोटो ही उपलब्ध है अभी )

और याद रखें------- लविज़ा कों आशीर्वाद देना है --------३० अप्रेल कों ........(दूसरी वर्षगाँठ पर ) .............

और अंत में ये बता दू कि ......चर्चा करते ही ......भीड़ बढ़ जाती है नए पुराने सब की

Saturday, April 10, 2010

आने वाले दिनॊ मे शायद आपमें से किसी के काम आ जाए .. ........





--------इस माह के खतम होते-होते गर्मियो की छुट्टियाँ शुरू हो जाएगी ..............कईयों की श्रीमतिजीयाँ
बच्चॊ को लेकर मामा के घर चली जाएगी और उसके बाद श्री लोगों का जो हाल होने वाला है..........उसके लिए ये पुर्वाभ्यास ....... आज ये ...........पेरोडी ( विरह गीत ) .............
चाहें तो अपनी आवाज मे रिकार्ड करें......................
-----(साथ की पेंटिंग वत्सल की बनाई हुई है) .................

इसे पिछ्ले साल सागर जी की एक पोस्ट पर टिप्पणी के रूप मे भेजा था , तब पोडकास्ट करना नही आता था।आभारी हूँ सागर जी की जिन्होने अपना अमूल्य समय देकर प्लयेर लगाना सिखाया ............(ब्लोग जगत में मदद करने वालों की कमी नही है ------बस मदद मांगने की देर है...........

पढिए सागर जी का २९/०६/२००९ को मुझे भेजा ये मेल -----

""""आदरणीय अर्चना जी,
मेल का जवाब बहुत देरी से देने के लिये क्षमा चाहता हूं। मैने ईस्निप्स पर आपका एक खाता खोला है। जिसकीआपको एक मेल मिली होगी। मेल में एक वेरिफिकेशन का लिंक होगा बस उस पर एक बार क्लिक कर दें। क्लिककरने के बाद ही आपका खाता चालू होगा।; और वहां हम अपने गाने अपलॊड कर उन्हें अपने ब्लॉग पर आसानी सेबजा सकेंगे।
जब आप वेरिफिकेशन वाले लिंक को क्लिक करलें मुझे बतायें जिससे मैं आपके और रचनाजी के गाये गीत कोवहां अपलोड कर सकूं और उसका सचित्र तरीका आपको बता सकूं।
मैं गाने को अपने ब्लॉग पर भी लगा देता हूं, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी यह पॉडकास्ट का तरीका सीखें।
मैं कई दिनों से आपसे पूछने वाला था कि आपकी बहन कौनसी रचनाजी हैं.. लेकिन रचना बजाज जी ने ही बता दिया कि आप उनकी बहन है। :)
एक बार फिर से क्षमा मांगता हूं।""""""


पेरोडी ( विरह गीत )





“गई हो जो सजनी तो जल्दी ही लौटें ,
किचन में हो जायेंगे कॊकरोच छोटे—
गई हो जो —

रोटी जल जाए सब्जी जो छौंके,
सब्जी जल जाए रोटी जो पलटें,
रोटी जले , सब्जी जले ,हलके-हल्के —
गई हो जो सजनी —-
कमर टूट जाए कपडों को धोके ,
कभी ना हो पाए झाडू और पोछे
आ भी जाओ काम करेंगे हम तुम मिलके—
गई हो जो सजनी —-

Tuesday, April 6, 2010

जिसको इसका काम पड़ता है उसे पता हो जाता है .....










पिछले हफ्ते करवाई------- मोम से सिकाई ----------बहुत उत्सुकता थी जानने की............
एक बॉक्स जो बिजली से गरम होता है उसमे मोम कों पूरी तरह पिघला लिया जाता है फिर एक टब में पिघला हुआ मोम डालकर उसे ब्रश से हिलाकर थोडा ठंडा (जितना गरम मरीज सह सके कर लेते है )--------इस पिघले मोम में शरीर के जिस हिस्से का उपचार करना होता है उसे रखकर उस हिस्से पर ब्रश से मोम की गरम-गरम सतह चढ़ाई जाती है,त्वचा के संपर्क में आते ही मोम जमने लगता है -----करीब आधा इंच मोटी सतह जमने के तुरंत बाद इस हिस्से कों प्लास्टिक के टुकडे से ढँक देते है ---उसके ऊपर एक मोटे कपडे से ढँक देते है जिससे मोम जल्दी ठंडा नहीं होता गर्मी बनी रहती है ------करीब १५-२० मिनट बाद जब मोम पुरी तरह ठंडा हो जाता है तब कपड़ा और प्लास्टिक हटाकर , उंगलियों और पंजे कों आगे पीछे हिलाते /चलाते हुए (पैर के के उअपचार में )मोम की सतह कों तोड़कर शरीर से अलग कर दिया जाता है ............. इसमे जो मोम उपयोग में लिया जाता है उसमे कुछ केमिकल मिले होते है जो त्वचा कों नरम बनाये रखते है ,और सतह से काफी अन्दर तक उतक कों गर्मी पहुचाते है (ऐसा डॉक्टर ने बताया ,पर केमिकल का नाम नहीं बताया --कहा medicated wax होता है ) सिकाई के बाद बहुत ही आराम महसूस होता है त्वचा का रंग लाल हो जाता है लगता है खून उतर आया हो फिर उपकरणों से आवश्यक कसरते करवाई जाती है----मुझे ९ दिन करवाने में ही बहुत आराम हुआ है .................जब पहले दिन डॉक्टर के पास गई थी तो पूछा था आखिर ये होता क्या है ?पहले कभी नहीं सुना या किसी कों भी पता नहीं है हर कोई पूछता है ये क्या है ?---उनके मुखड़े पर मुस्कान छा गई हंसकर बोले जिसको इसका काम पड़ता है उसे पता हो जाता है ................. बस बाकी ठीक .......कल से स्कूल जाना शुरू कर दिया है ........लकड़ी टिकाकर ...............शायद ८-१० दिनों में बिना सहारे के चलने लगूँ... ........................

(सभी चित्र गूगल से साभार )