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Thursday, March 26, 2015

कुछ यादें मीठी-मीठी.

सेल्फ़ी खीचने के शुरूआती दौर की फोटो .... ममता मैडम को सीखा रही थी .... smile emoticon और आज इस फोटो पर फ़ेसबुक के फ़ीचर ... स्टिकर को चिपका कर प्रयोग किया... कुछ यादे मीठी-मीठी... रहेंगी .....
.
. जब ये दाँत गिर जाएंगे .... smile emoticon
 — with Mamta Solanki.

Monday, September 15, 2014

सुप्रभात







सितारों की दुनिया से
हमको लौटा लाया सूरज
अंधेरी सुनसान रात को
फ़िर भगा आया सूरज

देखो किरन कैसे 
जगमगाई है
नन्ही सी चिरैया भी 
चह्चहाई है
ओस का बोझ 
नन्ही दूब ढो नहीं पा रही
और कीचड़ से सने अपने पैर 
धो नहीं पा रही


कहीं-कहीं बादल 
अब भी कड़क रहे हैं
सूरज के डर से 
दूर ही बरस रहे हैं....
अपनी- अपनी रोटी तलाशने को
फ़िर भी मजदूरों को जगा आया सूरज
सपनों की दुनिया से 
हमको लौटा लाया सूरज !

Sunday, June 8, 2014

पर्यावरण और हम ...






















इश्क करो हरियाली से 

जंगल की खुशहाली से

पंछी- पशु ,उड़े -फ़िरे

बुझे प्यास नदी तीरे

भरके स्नेह बाल्टी 

बहे सुगंध मालती 

वो प्यार से उचारती

     वसुन्धरा पुकारती ....

Wednesday, October 17, 2012

आँखें बोलती हैं...

 देखो! हँसना मत ....
मेरी इस नादानी पर ...
मैं ,हाँ मैं अब बड़ी हो गई हूँ ,कहते हैं--मेरे बच्चे!.....
और बूढ़ी भी हो रही हूँ...कहते हैं मेरे बच्चे!....
पर मैं जानती हूँ...
मैं अभी नादान हूँ....
नासमझ हूँ...
बातों को देर से याद कर पाती हूँ,
और जल्दी भूल जाती हूँ...
आँखें -देखना पहले से जानती थी ...
पैरों को चलना ...और
जीभ को बोलना- माँ-पिता ने सिखाया...
जीभ ने स्वाद लेना अपने आप सीख लिया..
आँखों से पढ़ना,और हाथों से लिखना सीखा दिया गया मुझे...

आँखें बोलती भी है ...अब जाना है मैंने .......

Thursday, July 19, 2012

बदली और बारिश...







मौसमों की राह नही तकती बदली
मेरी पलकों में छुप जाती है
जब भी उसका मन चाहे
बिन मौसम ही बरस जाती है...



पानी का मोल भी नहीं जानती
कई बार प्यासी रह जाती हूँ
सूने सपाट जीवन को ढोते
इंद्रधनुषी रंगों को तरस जाती हूँ...










सावन के झूले  याद आते मुझको
ताल के मेंढ़क जब भी टर्राते
मन भी मचल उठता है मेरा
जब मोर,पपीहा,कोयल गाते...

-अर्चना