Wednesday, June 15, 2011

मिसफिट:सीधीबात: दादी की पोथी ..और ग़ज़ल --

 जारी है ...सिर्फ श्रवण ....


मिसफिट:सीधीबात: दादी की पोथी  

और ये ग़ज़ल --

Sunday, June 12, 2011

मै और वो --- मेरा हमदम- मेरा दोस्त .........

मै और वो दोनों एक दुसरे को निहारते रहते थे ,साथ खाते थे,साथ सोते थे,साथ उठते थे,यहाँ तक कि सब-कुछ शेअर करने लगे थे|

अचानक मै बीमार पड़ गई ....पर ये क्या??? जानकर हैरान हो गई कि वो भी बीमार हो गया है ,बस फिर क्या था ...रात-दिन एक-दुसरे का हाल-चाल पता करते रहते

अब मेरे बिना वो और उसके बिना मै ...दोनों बैचैन रहते

कल से वो घर पर नहीं है ...मेरा मन नहीं लग रहा...

लगता है कुछ ज्यादा ही बीमार हो गया ...
पता नहीं क्या होने वाला है ....अब या तो वो रह पायेगा या मै .....
पर उसके बिना मेरा रहना थोडा मुश्किल होगा ........

बस इंतज़ार है उसका ....देखू क्या जबाब आता है .....

कल-कल करते -करते एक महिना तो हो ही चुका है.............
अब आज फिर कल कहा है ...................

आप भी प्रार्थना करो कि वो जल्दी वापस लौटे ..............

वर्ना मेरा ब्लॉग से और ब्लोगर साथियों से दूर का रिश्ता भी जाता रहेगा ..............



हां ................उसी पर तो पोस्ट बनाई है ..........मै और वो .........मेरा कम्प्यूटर ..................हा हा हा .....

Saturday, June 11, 2011

कुछ नया नहीं तो पुराना ही सही ....

15/01/2009 को पोस्ट किया था आज फिर वही

क्या मै लिखती हूँ  ?????????

एक दिन  अचानक पता चला की मै लिखने लगी
थोड़ा-बहुत नही ढेर सारा उगलने लगी ,
कहाँ से मुझको लिखना  आया ?,
साहित्य  का ज्ञान  कहाँ से पाया ?,
बहुत सोचा मगर समझ में नही आया !
फिर  लगा साहित्य  है?,या कुछ और ?
पर कुछ और होगा तो क्या ?????????????????
फिर  भी कुछ हाथ नही लगा ,
बहुत सर खपाया ,
और इसी उधेड़बुन में अपना पेन उठाया ,कागज पर रखा 
अरे ये क्या ?वो चलने लगा ,
पता नही कैसे ?
रुकने का नाम ही नही ले रहा था ,
और तभी दिमाग की घंटी बजी !!!!!!!!!!
ऐसा ही कुछ हुआ होगा ,
दिमाग  में ही कोई कीडा कुलबुलाया होगा ,
जाने कब से दबा हुआ था पेन ,
कागज देखते ही बाहर निकलने को छटपटाया होगा ,
पेन कागज पर गिरा होगा ,
और कागज स्याही से भर गया होगा ,
पढ़े -लिखे  लोगो ने समझा होगा ,
और समझदारों ने ही कहा होगा --------------
मै लिखने  लगी ,थोड़ा बहुत नही ढेर सारा उगलने लगी !!!!!!!!!!!!!!

Wednesday, June 1, 2011

जिन खोजा तिन पाईयां ............

कल जिस आवाज को आपने सुना उनके और उस गीत  के रचनाकार के बारे में बताने वाली थी आज ...
फिर सोचा मौके को भुना लू ...क्या पता उन्हें सुनने के बाद कोई ये सुनना भी पसंद करे या नहीं .....तो आज सुनिए वही गीत मेरी आवाज में ( एडिट उन्ही ने करके दिया है ).....



और हां ----कल की पोस्ट की टिप्पणियों से ज्ञात हुआ की पद्मसिंह जी और अनुराग शर्मा जी ....भी गाते है तो अब पॉडकास्ट की उनकी बारी रहेगी वे तैयार रहे ............हा हा हा ..........

Monday, May 30, 2011

गेट वेल सून ........

कई दिनों से तबियत ख़राब चल रही है ...... अब गीतों की ऐसी आदत पड़ गई है कि पॉडकास्ट नहीं  लगाने से ब्लॉग सूना लग रहा है ......ऐसे में एक पॉडकास्ट उपहार में मिला है ........आप भी सुनिए



..बताइए किसकी आवाज है ..कैसी लगी ?.......और ..रचना किसकी है ?..........इनके बारे में अगली पोस्ट में ..........छुपे हीरे है ये भी...........

 

Thursday, May 26, 2011

हाथों की चंद लकीरें ........

अपने महबूब का हर लफ्ज़ याद आता है ,
याद आता है- हर पल, हर लम्हा ,
हर लम्हा वो,जो बिताया था साथ,
सिर्फ साथ ही नहीं ,थामे हाथ में हाथ,
हाथों में अब फिर से नजरें थमी हैं,
लगता है इनमें लकीरों की कमी है ...

Tuesday, May 24, 2011

एहसास...

पहले नजरे भी मुझे चुभा करती थी ,
अब चेहरा ही ऐसा नहीं की देखे कोई,
कीलो के भी चुभने का एहसास नहीं होता,
अब चाहे जितनी नजरे गड़ा ले कोई ||