Wednesday, November 7, 2012

तस्वीर...




1-
तस्वीर से टकराकर लौटती है
झरोंखे से पड़ती धूप
चौंधियाकर-
आँखों के बन्द होते ही
तुमसे बिछड़ना
याद आ जाता है ....

2-
तुम्हारा बिछड़ना,
और बिछड़कर

तस्वीर बन जाना,
धूप से नफ़रत है -
तब से ....

3-
भोर से ही बैठे थे 
तस्वीर सजाने को
धूप चढ़ी तो रंग निखरा

अब शाम ढलने को है
कहीं रात के अँधेरे में 
बिछड़ न जाना तुम.....

४-

बिछुड़ना उदासी फ़ैला रहा है
हम सबके बीच
कोई हँसाओ तो जरा सबको.....

५-
हँसती हुई तस्वीर देखो
ज़रा तुम भी
कैसे रंग भरती है जीवन में
और ये देखो
इंद्रधनुषी रंग
जाने का मन नहीं करता मेरा...

-अर्चना













Saturday, November 3, 2012

शुभ - दीपावली



 ..
.रीवा से वापस लौटते समय किसी स्टेशन के आऊटर पर रूकी ट्रेन ...और  दिवाली के स्वागत में सजा ये घर देखा.....बच्चे अपनी पूरी मस्ती में ....एक ओर जहाँ बाजू के घर में भैया मोबाईल में व्यस्त हैं,वहीं पडोस की आँटी जी शाम का खाना बनाने  की तैयारी में व्यस्त ...हर कोई अपना-अपना काम कर रहा है ...(मैं भी ...)....और जब ट्रेन चल पड़ी तो ..टाटा करना नहीं भूली छुटकी गुड़िया.....

Friday, November 2, 2012

घर से बाहर निकलो ...


तुम्हारा बाहर निकलना जरूरी है
इस घर के बाहर के लोगों के लिए
उन लोगों को देखने के लिए
जिनके पास घर नहीं है
न थकन मिटाने के लिए
न घर के बाहर खड़े हो कर पुकारने के लिए
सूरज का उजाला हमेशा उनके सर पर होता है
और वो भूले से भी नहीं लौट पाते अपने घर
एक बार ही सही..
उनसे मिलने के लिए
घर से बाहर निकलो.....
- अर्चना

Friday, October 19, 2012

संगीत की मधुर लहरी....




विडियो यू ट्यूब के सौंजन्य से ....

यूँ ही संगीत सुनते-सुनते एक दिन ये विडियो मिल गया था ...किसी फ़ोल्डर में छुपा पड़ा था कल अचानक  फ़िर सामने आ गया आप भी सुनिये..और खो जाईये ...संगीत की मधुर लहरी में .......




Wednesday, October 17, 2012

आँखें बोलती हैं...

 देखो! हँसना मत ....
मेरी इस नादानी पर ...
मैं ,हाँ मैं अब बड़ी हो गई हूँ ,कहते हैं--मेरे बच्चे!.....
और बूढ़ी भी हो रही हूँ...कहते हैं मेरे बच्चे!....
पर मैं जानती हूँ...
मैं अभी नादान हूँ....
नासमझ हूँ...
बातों को देर से याद कर पाती हूँ,
और जल्दी भूल जाती हूँ...
आँखें -देखना पहले से जानती थी ...
पैरों को चलना ...और
जीभ को बोलना- माँ-पिता ने सिखाया...
जीभ ने स्वाद लेना अपने आप सीख लिया..
आँखों से पढ़ना,और हाथों से लिखना सीखा दिया गया मुझे...

आँखें बोलती भी है ...अब जाना है मैंने .......

Tuesday, October 16, 2012

जय माता दी!

                       आप सबको नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ