1-
तस्वीर से टकराकर लौटती है
झरोंखे से पड़ती धूप
चौंधियाकर-
आँखों के बन्द होते ही
तुमसे बिछड़ना
याद आ जाता है ....
2-
तुम्हारा बिछड़ना,
और बिछड़कर
तस्वीर बन जाना,
धूप से नफ़रत है -
तब से ....
3-
भोर से ही बैठे थे
तस्वीर सजाने को
धूप चढ़ी तो रंग निखरा
अब शाम ढलने को है
कहीं रात के अँधेरे में
बिछड़ न जाना तुम.....
४-
बिछुड़ना उदासी फ़ैला रहा है
हम सबके बीच
कोई हँसाओ तो जरा सबको.....
५-
हँसती हुई तस्वीर देखो
ज़रा तुम भी
कैसे रंग भरती है जीवन में
और ये देखो
इंद्रधनुषी रंग
जाने का मन नहीं करता मेरा...
-अर्चना






