Wednesday, June 30, 2010

वाह !!! क्या अदा है ............................................

 ------आपके लिए एक गिफ़्ट है ...................अदा जी की एक गज़ल.................मैने गाई है ..................पर अभी अदा जी से अनुमति नही मांगी है.....
-----पूछ लो, मान तो जायेंगी ही.
------आप देख/सुन ............ लिजिये ...------
------अच्छा गाया है
------ आप अदा जी से अनुमति मांग लें....
------अभी अदा जी से अनुमति ले लेते हैं. .........फोन पर बात कर ली उनसे...परमिशन ग्रान्टेड...अब इत्मिनान से पोस्ट करो.
------या  नीचे चिट्ठी देख लो------
------"बहुत अच्छा लगा सुन कर....किसी और की आवाज़ में अपनी रचना...मेरे लिए ये एक नया अनुभव हुआ यह ..सच में :)
शुक्रिया कहियेगा उनको"...
'अदा'


 आभारी तो मैं हूँ अदा जी आपकी ........जो आपने इसे पसन्द किया......आभार उस मित्र का भी जिसने मेरी मदद की .......

आओ करें एक प्रार्थना...................बच्चों के साथ................आँखे बन्द कर .................




 १ जुलाई से स्कूल शुरू हो रहे है ..........ईश्वर से प्रार्थना है -------सब बच्चे स्कूल में पढ पायें..................अपने सपने पूरे कर पाएं..................उनका बचपन...................खिलखिलाता रहे .................आओ आज इस प्रार्थना के बाद आँखें बन्द कर सब मिलकर यही मांग ले ........................
अपने-अपने ईश्वर से.........................................................................



http://www.columbiaconvent.com/photogallery.htm

Tuesday, June 29, 2010

मित्र के साथ मुकदमा............................... जीत गई मै !!...............................(पक्का पता नही है )..........

माननीय जज साहब ,
मुझ पर एक मित्र ----"ब्लॉग  लिखने का "ज्ञान" उन्होंने ही दिया है," और फ़िर हमारा तो स्वभाव ही ऐसा है कि किसी का आभार व्यक्त करना हो तो ऐसे करें कि अगला किसी का भला करे तो सोच समझ करे ना कि मन किया और कर दिया किसी को भी प्रेरित ।" (हर बार एक नया सम्बोधन देते हैं मुझे ---हिन्दी कमजोर है ---उनकी )--------का आरोप है कि मैं दूसरों की पोस्ट का पॉडकास्ट करती हूँ....................अब मैं ये तो पहले ही बता चुकी हूँ कि  -----"न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे .....न ही किसी कविता के .....और न किसी कहानी या लेख को मैं जानती ....बस जब भी और जो भी दिल में आता है .......लिख देती हूँ "मेरे मन की" -----"
भला अब आप ही बताएं-- मुझे तो ज्ञान आप-पास से ही ढूँढ्ना पडेगा न !......और मैं समझदार हूँ ( गवाह है मेरे पास )................
मैं इस आरोप से इंकार करती हूँ..............मैं सिर्फ़ उसी पोस्ट का पॉड्कास्ट बनाती हूँ....जो अच्छी हो या जिसे लोगों को जानना /सुनना/या पढना चाहिए ....(मेरी समझ से).............चाहे वो मेरी हो या दूसरों की ..............( गानों की बात नहीं कर रही ....वो तो झेलना ही पडेंगे आखिर मूड भी तो कोई चीज है ? बनाना तो पडता ही है न !)...........
मैंने अब तक जो पॉड्कास्ट किए है ..उसमे से कुछ सबूत प्रस्तुत है ......

सखिया आवा उडि़ चलीं..’

एक लघुकथा........

....एक गीत

कुछ कहने से बेहतर होगा.................सुनना..........

रक्तदान, देहदान  महादान ...
बाल-उद्यान

आवाज
भोपाल त्रासदी
इनको सबने अच्छा ही बताया है ...........
आगे मैं यह कहना चाहती हूँ कि ------"क्या ये बेहतर नहीं होगा कि कहाँ ,किसने ,क्या कहा के बजाय  ये बताएं कि आज कहाँ,किसने क्या अच्छा कहा !!!.."................................मैं पूछती हूँ कि लोग बुरी बातों का जिक्र
करते ही क्यूं है ?......................करेंगे ही नहीं तो वो फ़ैलेगी ही नहीं....................
इसे उदाहरण से समझ लें----------जब कोई एक बच्चा मेरे पास शिकायत करता है कि -फ़लां बच्चे ने मुझे गाली दी, अब सब गालीयां सबने सुनी थोडी रहती है ...पहले तो डिसाइड करना पडता है कि गाली है कि नहीं?.........इसमें बहुत समय खराब हो जाता है ...................इसलिए मैं तो शिकायत करने वाले बच्चे को ही एक चांटा डांटती हूँ (हाँ अब लगा नहीं सकते ..)कि -तुमने सुना ही क्यों?......और सुना तो तुम लिख कर दे दो ----क्या बोला ............मैं देखती  हूँ क्या कर सकती हूँ.................अगर गाली हुई तो उसे बुलाएंगे ..........वरना ...............


गानों के लिए भी सबूत हैं मेरे पास  --- क्यों गाती हूँ इस बात के भी सबूत हैं मेरे पास (सबूतों को बेह्तर करने केलिए गवाहों को वक्त दिया है ---....उचित समय पर उनकी अनुमति लेकर प्रस्तुत किया जा सकेगा ) ..........
वैसे तो कई तारीखों पर बहस करके समझौता कर लिया है मैने...........अब वे मेरे मित्र  ही हैं . (पता बता पाने मे मैं असमर्थ हूँ------क्योंकि उनका कहना है कि एक बार किसी ने उनका पता दिया था तो सही पता होने के बाद भी गलत लोग आ पहूँचे थे .)....... ..........
फ़िर भी आप चाहें तो  ---------------भविष्य में ऐसे सबूत भी दे पाने की कोशीश करूंगी कि हमारा समझौता हो चुका है........समझौता होने की खुशी मे मित्र को एक गीत भेंट देना चाहती हूँ . ..................

 

और एक संदेश भी :----



...बस अब और मुझे कुछ नहीं कहना .!!!................

Monday, June 28, 2010

अब क्या करूँ ?.............................................बाँट दूँ ?????

मैं ईश्वर को अपनी परेशानी दे देती हूँ.........कह देती हूँ------उसने ही भेजा है ..........तो उसे ही बताना है कि ----आज क्या करना है ?.........क्योंकि उसे ही पता है कि उसने क्यों भेजा है.............जो भी अच्छा काम करवाना हो करवा ले .................
आज मुझे क्या करना है मैं ये नही सोचती .............क्योंकि मुझे पता थोडे ही रहता है कि मैं किस वक्त तक .रहूँगी !!!.........................जब भी समस्या आती है -----पूछ लेती हूँ अब क्या करूँ ? आगे बता ................बस ..........

Friday, June 25, 2010

क्योंकि ------ प्यार करने वाले -

नींद टूट चुकी थी मेरी
अब तक इतनी बैचैनी -कभी नहीं हुई 
अब लगता है 
मेरा दिल भर गया है 
उफ़न-उफ़न कर बाहर 
गिर रहे हैं शब्द
मैं समेटना चाहती हूँ
अतीत को यादों में
लिखना चाहती हूँ 
कोई किताब
बाँटना चाहती हुँ अनुभव
सुधारना चाहती हूँ सोच 
और, बताना चाहती हूँ उपाय
कई सवालों के ...
"जबाब"  मुझसे नही जाने तो,
ढूँढते रह जाओगे....
आओ-- मदद करो
हाथ बढाओ
समेंटो शब्दों को
और लिखो 
कहानी मेरी 
बहुत पुरानी
बडी लम्बी 
मोटी बनेगी मेरी किताब  
करेगी बहुत हिसाब
और फ़िर 
हम जियेंगे शान से ...
क्योंकि ------
प्यार करने वाले -
जीते हैं --शान से
मरते है ---शान से ...................

अब दिन भर के लिए ये गीत ...............


Wednesday, June 23, 2010

तनाव ..............कारण..... ............और.................... निवारण

इन दिनों शिक्षकों को शिक्षा देने के उद्देश्य से स्कूल में सेमिनार चल रहे हैं।कल तनाव मुक्त कैसे किया जाए? ये बताने /समझाने वाले आए थे सभी शिक्षकों को इकठ्ठा कर लिया गया था...............
सबसे पहले बताया गया ------धर्म से न जोडें.......इस बात को ......पूरी तरह अध्यात्मिक है.........
कुछ देर बाद लक्ष्मी जी का उदाहरण देते हुए पूछा गया --वे किस मुद्रा मे रहती हैं चित्रो मे?
तुरन्त जबाब मिला ---हाथ से पैसे नीचे गिराते हुए......
समझाया -----हाँ,इसका मतलब "Don;t hold money " .......वो उपर से आता है और नीचे चला जाता है ....
...अगर होल्ड कर लेंगे तो बहाव रुक जायेगा .......................................
अब मेरा दिमाग दौडने लग गया था (स्पोर्ट्स मे होने से जल्दी वार्मअप  हो जाता है ) ..........वहाँ बैठे सारे शिक्षकों पर नजर सरपट दौड रही थी हर चेहरे से नजर मिलते ही मुस्कराहट का आदान-प्रदान  भी हो रहा था..............और मेरे दिमाग का घोडा ये तय करते जा रहा था कि .........करीब हर धर्म को मानने वाले सभ्रान्त लोग वहाँ बैठे थे  ............अब वो बात जिसके लिए भूमिका बनानी पडी ...........


....................................टेस्ट पेपर ....१................................


नोट :----तीसरा प्रश्न अनिवार्य है ।प्रत्येक प्रश्न के नम्बर निर्धारित है ।प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट व अलग -अलग लिखे जाएं ।
जिन विद्यार्थियों को विषय की जानकारी न हों वे परीक्षा में न बैठें।


प्रश्न १:- लक्ष्मी जी का उदाहरण मुझे तो समझ मे आ गया ( बचपन से मंदिर के अलावा कहीं तो भेजा नहीं गया था )मै कभी मस्जिद/गिरजाघर/गुरूद्वारा नहीं गई पर जानना चाहती हूँ वहाँ अन्दर क्या होता है ? मै सोच रही थी जो शिक्षक मुस्लिम/सिख/ईसाइ धर्म के हैं वे इसे किस तरह से  समझ रहे होंगे ?


प्रश्न २:-मेरे स्कूल में हर धर्म को मानने वाले बच्चे पढते हैं मैं चूंकि स्पोर्ट्स टीचर  हूँ पूरे स्कूल्के हर बच्चे के साथ मेरा दिल का रिश्ता बन जाता है ,अब मै सोच रही हूँ-- राहुल/मयूरी को तो मै समझा सकती हूँ ,पर अरबाज़/मनप्रीत या लिलियन को कैसे समझाउं और किससे रिलेट करके ?


प्रश्न३:-इससे तनाव बढा या कम हुआ ?

रुला के गया सपना.............................. मेरा .............................( कृपया शीर्षक पर ना जाए ...................भावो को समझे .......)