Tuesday, April 5, 2011

नवरात्रि पर्व १ - रानी जयचन्द्रन की कविता

नवरात्रि पर्व के प्रथम दिवस पर "शरद कोकास" नामक ब्लॉग पर प्रकाशित कविता-----
अनुवादक--सिद्धेश्वर सिंह जी
 

5 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

पोस्ट पढ़ी है, सुन्दर पाठन आपके द्वारा।

GirishMukul said...

बधाई

शरद कोकास said...

अर्चना जी , कविता में वाचिक पाठ का बहुत महत्व होता है। इससे कविता के नये अर्थ खुलते हैं । आपका उच्चारण बेहद स्पष्ट है तथा स्वर तो मधुर है ही । बहुत अच्छा लगा यह प्रयोग । मेरे और सिद्धेश्वर जी की ओर से बहुत बहुत धन्यवाद ।

उत्‍तमराव क्षीरसागर said...

अच्‍छा प्रयोग...ऐसे उपक्रम ही कवि‍ता को सर्वग्राह्य बनाते हैं...शुक्रि‍या...बधाई...

ashish said...

वाह , मधुर और सुस्पष्ट पाठन