Thursday, April 7, 2011

रात आई थी ...मगर उबासी लेती...

8 comments:

Udan Tashtari said...

वाह वाह!! आनन्द आ गया...क्या बात है...बहुत उम्दा धुन एवं स्वर.

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut badiya

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

बहुत सुन्दर , भावपूर्ण एवं प्रवाहमयी रचना .....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

गीत भी बढ़िया,
स्वर भी बढ़िया!

प्रवीण पाण्डेय said...

जितना सुन्दर गीत, उतना सुन्दर गायन।

Avinash Chandra said...

गज़ब! बहुत सुन्दर गीत और उतना ही मधुर गाया है आपने।

राकेश खंडेलवाल said...

स्वर के बिना गीत था केवल बुझे हुए दीपक की बाती
मिली आपके स्वर से सरगम,शब्द सभी जीवन्त हो गये
सारंगी की धुन से सजकर बहते हुये हवाओं के सुर
मिले आपकी वाणी से तो गीतों के वे छन्द हो गये

डॉ. मोनिका शर्मा said...

शब्द, स्वर दोनों कमाल.....