Saturday, August 25, 2012

तिनका-तिनका...है रोशनी से जैसे भरा...

 एक गीत यूं ही गुनगुना लिया....तिनका तिनका...
अच्छा तो नहीं है ...चल जाएगा...:-)

6 comments:

Ramakant Singh said...

किसी सुन्दर बोल को खुबसूरत आवाज मिल जाये तो भाव जीवंत हो उठते हैं .इस गाने के बोल मन को छुते हैं , आपका किन शब्दों में शुक्रिया किया जाये . आपसे कल शाम इस गीत को गुनगुनाने का आग्रह किया और सुबह की शुरुवात की सुन्दर आवाज के साथ . आज की तारीख में अर्जित समस्त पुन्य आपको समर्पित .माँ सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहे बस यूँ ही गुनगुनाती रहें .

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

मेरा पसंदीदा गीत है!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत गीत

प्रवीण पाण्डेय said...

यह गीत बहुत अच्छा लगता है..

Anju (Anu) Chaudhary said...

बहुत बढिया जी ...अच्छा लगा आपकी आवाज़ को एक बार फिर से सुनना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
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इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (26-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!