Sunday, May 19, 2013

यत्र आलस्य तत्र वात्सल्य ....

अनूप जी की पोस्ट को यहाँ पढ़ सकते हैं आप ---
और सुने यहाँ---

11 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

पढ़कर और तब सुनकर रचना पूर्ण हो गयी मन में।

सरिता भाटिया said...

बहुत अच्छा जरिया शुक्रिया
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (20-05-2013) के 'सरिता की गुज़ारिश':चर्चा मंच 1250 पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
सूचनार्थ |

संध्या शर्मा said...

बहुत बढ़िया पोस्ट... आवाज़ लाज़वाब

sheetal said...

aalas devo bhava..
iski har waqt karte raho puja
isse badhkar nahi koi aur kaam duja

sheetal said...

aalas devo bhava..
iski har waqt karte raho puja
isse badhkar nahi koi aur kaam duja

Anupama Tripathi said...

आराम शब्द में राम छिपा जो भव बंधन को खेता है .....आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है ....!!:))

रचना भी बढ़िया और आवाज़ और अंदाज़ भी सुन्दर ...

अनूप शुक्ल said...

अच्छे से रिकार्ड किया है आपने शुक्रिया। धन्यवाद!

मेरे यहां लगता नेट में कुछ लफ़ड़ा है। 1.43 मिनट के आगे सुनाई ही नहीं देता। :)

Laxman Bishnoi said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति !
बहुत कुछ का अनुसरण कर बहुत कुछ देखें और पढें

दिगम्बर नासवा said...

मज़ा आ गया जी सुन के ...
शुक्रिया ..

Ramakant Singh said...

आज करे सो काल कर, काल करे सो परसों
इतनी जल्दी क्या है बेटा जीना है कई बरसों

अनूप शुक्ल said...

हां अब सुनाई दिया कायदे से। फ़िर से धन्यवाद! :)