Wednesday, May 22, 2013

कालजयी कविता की खोज ...

शब्दों की तलाश में मेरी कविता 
निकल पडी है दूर तलक 
कालजयी होना है, 
कहा था उसने मुझसे 

समझी नहीं -
मेरे समझाने पर भी 
बहुत रोका मैंने 
ये कहकर 
की कालजयी कविताएँ 
जा चुकी है 
काल के ही साथ . . . 
और ले गई है साथ अपने 
गूढ़ अर्थों वाले 
आलंकारिक शब्दों को भी 
जिन्होंने पकड़ रखा था 
हाथ समासों का 
जो घिसटते चले गए 
उसी के साथ ...

सुना है काल के साथ ही 
स्वाहा हो गए थे अरण्य भी ...
नतीजतन अब 
मेरी कविता भटक रही होगी 
सादे सपाट मैदान में ही कहीं 
आशंकित हूँ ,
लौटेगी या नहीं 
मेरे एकाकी जीवन में ........
कही बचे -खुचे 
शब्द भी फुर्र न हों जाएं 
उसके लौटने से पहले ....

12 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुना है काल के साथ ही
स्वाहा हो गए थे अरण्य भी ...
नतीजतन अब
मेरी कविता भटक रही होगी
सादे सपाट मैदान में ही कहीं

जंगल जिस तरह समाप्त हुये हैं उस पर प्रकाश डालती अच्छी रचना ।

प्रवीण पाण्डेय said...

शब्द सदा ही साथ रहेंगे, वही रहेंगे, जो अपने थे।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

नतीजतन अब
मेरी कविता भटक रही होगी
सादे सपाट मैदान में ही कहीं,,,

बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,
Recent post: जनता सबक सिखायेगी...

JAGDISH BALI said...

There is no knowledge without poetry. Nice and straight !

sanny chauhan said...

bahut badiya
ek bar idhar bhi ayen

http://hinditech4u.blogspot.in/

मीनाक्षी said...

कालजयी कविता है आज भी लेकिन उसका रूप बदला है बस.. आधुनिक युग में रहती है अलंकार और समास रहित...भला हो ब्लॉग़बुलेटिन का जिसने इधर की राह दिखाई.. :)

अरुणा said...


समय के साथ परिवर्तन कविता में भी दीखता है

शिवनाथ कुमार said...

सुना है काल के साथ ही
स्वाहा हो गए थे अरण्य भी ...
नतीजतन अब
मेरी कविता भटक रही होगी
सादे सपाट मैदान में ही कहीं

समय का प्रभाव कविता पर तो दीखता ही है
बहुत खूब
सार्थक और गूढ़
सादर आभार!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

लाजवाब प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

kshama said...

शब्दों की तलाश में मेरी कविता
निकल पडी है दूर तलक
कालजयी होना है,
कहा था उसने मुझसे
Aasha kartee hun ki aapkee kavita zaroor kaljayee ho!

Rangraj Iyengar said...


बहुत ही सुंदर प्रस्तुति.

विचारों की श्रृंखला का सुंदर चित्रण.

अयंगर.

राजीव कुमार झा said...

सुन्दर भाव