Sunday, January 26, 2014

गणतंत्र दिवस- विशेष.....







नन्ही कलाकार  आर्या शुक्ला से आप अपरिचित नहीं हैं ....--
आज एक और बात बताना चाहती हूँ कि राष्ट्र के प्रति प्रेम को दिखाने की जरूरत नहीं होती ...इसे महसूस किया जाना चाहिए ..... और अपने बच्चों को इस भावना से रूबरू करवाना माता-पिता का कर्तव्य है....
आर्या के माता-पिता हर वर्ष पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को आर्या की स्कूल आते हैं और कार्यक्रम के साक्षी और सहभागी बनते हैं .....
आर्या के माता -पिता का इस कार्य के लिए अभिनन्दन .....


प्रस्तुत है आर्या शुक्ला की आवाज में उनके पापा प्रशान्त शुक्ला की लिखी एक कविता ---


गणतंत्र दिवस की बधाई आप सभी को .......

9 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (26-01-2014) को "गणतन्त्र दिवस विशेष" (चर्चा मंच-1504) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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६५वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

राजेंद्र कुमार said...

गणतंत्र दिवस कि हार्दिक शुभकामनायें!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

मेरी ओर से गण्तंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और विशेष आभार आर्या और प्रशांत जी का जिन्होंने इतनी सुन्दर रचना हमारे समक्ष प्रस्तुत की.. और हाँ, तुम्हारा भी आभार, इस ख़ूबसूरत सन्देश को हम तक पहुँचाने के लिए!!

Prabuddh Dubey said...

बहुत खूब आर्या, तुम्हे गणतंत्र दिवस कि हार्दिक शुभकामनायें! कविता बहुत ही अच्छी लगी सुनकर. प्रशांत जी को इसके लिए खास बधाई और शुभकामनाये। प्रशांत जी आप जैसे माता पिता हर शिशु के हों तो अगली पीढ़ी का भविष्य बहुत उज्जवल रहेगा।
एक बार और ह्रदय से बधाई.

प्रबद्ध दुबे

vandana gupta said...

सुन्दर प्रस्तुति …………भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हो तो पहले खुद को बदलो
अपने धर्म ईमान की इक कसम लो
रिश्वत ना देने ना लेने की इक पहल करो
सारे जहान में छवि फिर बदल जायेगी
हिन्दुस्तान की तकदीर निखर जायेगी
किस्मत तुम्हारी भी संवर जायेगी
हर थाली में रोटी नज़र आएगी
हर मकान पर इक छत नज़र आएगी
बस इक पहल तुम स्वयं से करके तो देखो
जब हर चेहरे पर खुशियों का कँवल खिल जाएगा
हर आँगन सुरक्षित जब नज़र आएगा
बेटियों बहनों का सम्मान जब सुरक्षित हो जायेगा
फिर गणतंत्र दिवस वास्तव में मन जाएगा

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत सुन्दर कविता, उतना ही सुन्दर पाठ

Lalit Chahar said...

सुन्दर प्रस्तुति...

आपका मैं अपने ब्लॉग ललित वाणी पर हार्दिक स्वागत करता हूँ मैंने भी एक ब्लॉग बनाया है मैं चाहता हूँ आप मेरा ब्लॉग पर एक बार आकर सुझाव अवश्य दें...

Digamber Naswa said...

अती सुन्दर ... बधाई और गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें ...

Onkar said...

सुन्दर