Tuesday, October 4, 2016

बिना बिन्दी की रंगोली....

कविता-- 
सुखे मुंह मे शक्कर गोली,
पूरण-पोळी,या 
गटागट की गोली ...

कविता--एकाकी की हमजोली,
मन की होली,
बिना बिन्दी की रंगोली.... 


4 comments:

Vipul Bhardwaj said...

छोटी कविताओं का भी अपना मजा है। आपकी कविताएं काफी अच्छी हैं। मेरी लिखी कविताएं भी पढ़ें : http://hindivandana.com/end-of-pakistan-terror/

जसवंत लोधी said...

यह नन्ही कविता बहुत अच्छी लगी ।💏

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 6-10-16 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2487 में दिया जाएगा
धन्यवाद

प्रतिभा सक्सेना said...

हाँ परिभाषित कर सकते हैं यों भी !