Wednesday, October 26, 2016

सारा प्यार तुम्हारा मैनें बाँध लिया है आँचल में


सबसे पहले केक -


एक गीत याद आ रहा है - 
चेहरे पे खुशी छा जाती है , आँखों में सुरूर आ जाता है 
जब तुम मुझे अपना कहते हो, अपने पे गुरूर आ जाता है 

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अर्चना चावजी के जन्मदिन की चाय पार्टी में आपका स्वागत है.... 😊

केक पर मोमबत्तियाँ प्रतीक होती हैं प्यार की
प्यार भरे उजालों की
धीरे धीरे संख्या बढ़ती है
अनुभव
नए चेहरे
कोई नन्हीं हथेली आगे बढ़कर केक काट देती है
जन्मदिन स्वादिष्ट हो जाता है
कई फूल आँखों के आगे बिछ जाते हैं
कोई हौले से कहता है,
देखो - मैंने तुम्हारे लिए कैसा खज़ाना बनाया
उसी ख़ज़ाने में हम भी हैं अर्चना
मायरा को गोद में लेकर कह रहे हैं
हैप्पी बर्थडे
... खूब खुश रहो
हर क्षेत्र
हर दिशा में
तुम्हारी कर्मठता का पताका फहराये
कभी तुम्हारी आवाज़
कभी तुम्हारे लिखे
कभी तुम्हारे बनाये स्वेटर में
हमें ज़िन्दगी की गर्माहट मिल जाए ...

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीदी 💗💛💜💚💙
 — with अर्चना चावजी.

ओह! ...
भाग्यशाली हूँ कि एक दिन बाद भी बधाईयाँ मिलने का सिलसिला ख़तम नहीं हो रहा .......
ईश्वर ने बहुत कुछ लेकर गलती महसूस की और अब उससे ज्यादा स्नेह और प्यार लौटा रहा है ........ मैं नम आँखों से नतमस्तक हूँ .......
आप सबका का प्यार सर माथे पर ....... सभी साथियों को सादर धन्यवाद
 आपकी शुभकामनाओं के लिए आभार 

कल के स्नेह से सराबोर हूँ..
बस ....उस सर्वशक्तिमान की आभारी हूँ,जिसने जन्म दिया और जिसने अंत भी तय कर दिया है .......
इस बीच जीवन जीने के तरीके सिखाने वाले मेरे माता-पिता को रोज सुबह उठकर सबसे पहले मन ही मन चरणस्पर्श करती हूँ,इससे मुझे सच्चाई के साथ दिन की शुरुआत करने की ऊर्जा मिलती है .......

आपके आशीषों की बरसात यूं ही होती रहे तो-
यूं ही कट जाएगा सफर साथ चलने से की मंजिल आ ही जाएगी साथ चलने से। .

और ये पिछले साल का स्नेह भैया का -
समझ में नहीं आता कि वो चित्रकार है या नाटककार. हरी भरी वसुंधरा पे कितनी सुन्दर चित्रकारी करता है और इतने सारे अनगिनत चरित्रों को लेकर इतना कॉम्पलेक्स नाटक लिख देता है! हर पात्र का एक अलग ठिकाना, अलग भाषा, अलग बोली... लेकिन कहाँ से कहाँ जोड़ देता है वो. ऐसे जुड़ाव को हम रिश्ता कह देते हैं, लेकिन ये रिश्ते कैसे बने, सोचकर आश्चर्य होता है... अकल्पनीय है यह सब!
अर्चना से मिलना, पहले ई-मेल फिर फ़ोन और फिर ब्लॉग, फेसबुक और फिर घर परिवार. अब तो झूमा, रानू, भाभी, माँ, मामी, देवेना, वत्सल, नेहा, रचना निशि, विनी, आपू, गुड़िया, बाली... ये सारे नाम बस नाम न होकर रिश्तों की डोर में बँध गए हैं! कभी न आओ तो वो पुकार लेती है और कभी मैं. एक प्यारी सी मायरा के किस्से सुनाती उसकी नानी है वो और मेरी छोटी बहन.
आज जन्मदिन है उसका! तो मेरी और भाभी की ओर से हैप्पी बर्थ डे! हर खुशी हो वहाँ, तू जहाँ भी रहे! जीती रहो!

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1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जन्म दिन की शुभकामनाएँ भतीजी को।
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आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (28-10-2016) के चर्चा मंच "ये माटी के दीप" {चर्चा अंक- 2509} पर भी होगी!
दीपावली से जुड़े पंच पर्वों की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'