Wednesday, December 22, 2010

एक भावपूर्ण गीत..मन्नाडे दा का....

एक बहुत ही भावपूर्ण गीत-----बहुत कठिन लगा पर कहते है न-----कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ...

12 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत भावपूर्ण गीत...

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत गहरा गीत, आँख बन्द कर सुनना अच्छा लगता है।

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर जी धनयवाद

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut sundar

Harman said...

very nice...

सुशील बाकलीवाल said...

मेरे कम्पयूटर पर तो लिंक ही नहीं खुला.

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - पराजित होती भावनाएं और जीतते तर्क - सब बदल गए - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

संजय भास्कर said...

सुंदर सुंदर सुंदर बहुत ही सुंदर.....बधाई !

daanish said...

इतना मुश्किल गीत
इस क़दर आसानी से गा दिया आपने ...
"होगा मसीहा सामने तेरे..."
स्वरों का साथ बिलकुल नहीं छोड़ा आपने
बधाई .
कभी वो गीत भी गुनगुआयिये...
"तुम अपना रंजो-गम, अपनी परेशानी मुझे दे दो..."
फिल्म = शगुन
आभार .

Manish Kumar said...

behtareen prayaas is kathin geet ko gane ka.

Manish Kumar said...

behtareen prayaas is kathin geet ko gane ka.

शरद कोकास said...

बहुत अच्छे गीत का चयन किया है आपने गायन हेतु । सुन्दर प्रस्तुति ।