Tuesday, May 17, 2011

मेरे अनुज की रचनाएं --

मेरे अनुज के ब्लॉग "घोंसला" से उसकी कुछ रचनाएं.....ब्लॉगर की मेहरबानी से एक बार फ़िर से ----(दो सुन चुके होंगे --दो बाकी हैं )


 काश सुन पाते----



अनुभव---



न जाने क्यों----



बिटिया----



7 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत ही सुंदर

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही सुन्दर रचना।

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर और बढ़िया!

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

DR. ANWER JAMAL said...

आपकी आवाज़ ने राजीव जी की रचनाओं तक पहुंचाया। सभी रचनाएं एक से बढ़कर एक हैं और ‘न जाने क्यों ?‘ तो सबसे बढ़कर लगी मुझे , न जाने क्यों ?

http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/exploitation.html

Rajiv said...

दीदी,प्रणाम.आपने मेरी रचनाओं (जो किसी न किसी रूप में मेरा अंश है) को अपनी आवाज देकर उसे जो स्थायित्व प्रदान किया है,उसके लिए मैं सदा आपका आभारी रहूँगा. आपकी आवाज में अपनी कविताओं को सुनना एक सुखद और सुकून-भरा अनुभव है मेरे लिए.