Sunday, May 22, 2011

किसी को पता है ?

किसी से सुना है एहसानों के बोझ तले दब जाता है आदमी,
पर पता नहीं एहसानों को उठाने कब जाता है आदमी..........

11 comments:

सुज्ञ said...

सार्थक सटीक है यह सच्चाई

रश्मि प्रभा... said...

बहुत बढ़िया

ktheLeo said...

Nice one!

वन्दना said...

खूब कहा।

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut badiya

Kajal Kumar said...

:)

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब ....
:-)

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

@एहसानों को उठाने कब जाता है आदमी...
जब ज़रूरत का बोझ अहसान से ज़्यादा लगता है तब व्यापारी इंसान ऐहसान उठा लेता है, अक्सर यूँ होता है कि ज़रूरत पूरी होते ही अहसान बोझ लगने लगता है}

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!

प्रवीण पाण्डेय said...

गहरा।

Udan Tashtari said...

ये ब्ब्बात!!!!