Wednesday, October 16, 2013

तुम क्या जानो कैसे .....

घड़ी का अलार्म,उगता सूरज, और भोर की लाली
बिस्किट की प्लेट के साथ एक चाय की प्याली
टेबल पर अखबार और तुम्हारी कुर्सी खाली

तुम क्या जानो, इनकी कैसे आदत डाली.......


फ़टाफ़ट नाश्ता, स्कूल और बच्चों की तैयारी
बस छूटी तो स्कूटर की ट्रिपल सवारी
दिन भर की थकान और काम भारी...

तुम क्या जानो, इनकी कैसे आदत डाली.......

4 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

जीवन का हर दिन प्रारम्भ होता है, ऐसे ही।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

:(

संजय भास्‍कर said...

प्यारी सी पोस्ट .....
Be Lated........जन्मदिन मुबारक अर्चना मासी :))

@ संजय भास्‍कर

देवेन्द्र पाण्डेय said...

:(