Sunday, October 20, 2013

बेचैनी


नींद कहाँ इन आँखों में
अब खौफ है इनमें सपनों का
क्या दोष लगाएँ दुश्मन पे
अब खौफ है उनमें अपनों का
रिश्ते - नाते सब झूठे हैं
रहा साथ सदा बेगानों का
मीठी बातों में जहर भरा
जाने कितने अफ़सानों का......

7 comments:

Shekhar Suman said...

ये क्या है ??? क्यूँ है ??

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन बच्चा किस पे गया है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

संजय भास्‍कर said...

क्या ऐसा होता है सच में ?

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-10-2013)   "जन्म-ज़िन्दग़ी भर रहे, सबका अटल सुहाग" (चर्चा मंचःअंक-1407)   पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

प्रवीण पाण्डेय said...

मन में भय का महल बनायें,
भागे फिरते हर द्वारे हम।

वाणी गीत said...

दुश्मन के वार सामने और मित्र हो पीठ पीछे तो बेचैनी स्वाभाविक है !