Wednesday, June 11, 2014

छोटी सी बात .....

फिर एक नए दिन का इंतज़ार
कि सुबह सूरज अलसाया सा उठे
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ओढ़कर बादलों की चादर....
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निकले पंछी कलरव करते
कि पशुओं से भी छूट गए खूंटे
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खुश हो थोड़ा घूमें बाहर.........
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ठंडी सी बयार आए
लेकर के संदेसा बूंदों का
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भीनी सी महक मन ले हर ......
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यादों का पुलिंदा सर पर बोझ सा
अश्रु संग बह जाए अकेले में
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तू अपनों को जब चाहे याद कर ....

6 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन हुनर की कीमत - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Kailash Sharma said...

यादों का पुलिंदा सर पर बोझ सा
अश्रु संग बह जाए अकेले में
...लाज़वाब अभिव्यक्ति...

आशा जोगळेकर said...

ठंडी सी बयार आए
लेकर के संदेसा बूंदों का.

आमीन। बहुत सुंदर प्रस्तुति।

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुंदर ।

Mahesh Barmate said...

यादों का पुलिंदा सर पर बोझ सा
अश्रु संग बह जाए अकेले में
.
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तू अपनों को जब चाहे याद कर ....

सुंदर पंक्तियाँ, बेहद सुंदर प्रस्तुति

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (30-06-2014) को "सबसे बड़ी गुत्थी है इंसानी दिमाग " (चर्चा मंच 1660) पर भी होगी।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'