Sunday, June 8, 2014

थोडा सोचा होता--------------------------------------

--  वत्स भीष्म ...........
काश तुम अपनी प्रतिज्ञा तोड देते 
तो क्या हमें तुम जैसे  --
दो चार या ज्यादा.......
शूरवीर,बलवान,
धैर्यशील,गुणवान वीर
----और न मिलते ???
कितना अच्छा होता--
यदि तुम ये प्रतिज्ञा न करते.....
और बदले में
इसे लेने को
दुर्योधन को प्रेरित करते ,
ये तुमने अच्छा नहीं किया--
तुम तो बस-- एक बार बाणों पर सो गये
और बाणों की नोकों को ----
हमें --इतना अन्दर तक चुभो गये
आज तक हम इस पीडा को भोग रहे हैं--
और अब भी कहीं---
दुर्योधन के वन्श में----
-----------और ---------------जैसे डॉन--
जन्म ले रहे हैं.............................

2 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन सेर और सवा सेर - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

आशा जोगळेकर said...

और अब भी कहीं---
दुर्योधन के वन्श में----
-----------और ---------------जैसे डॉन--
जन्म ले रहे हैं..........