Tuesday, October 19, 2010

बोलो ठीक है न......एक पुरानी पोस्ट.............................

जो कुछ चाहो , वो मिल ही जाए ,
ऐसा कभी नही होता है ।
इसलिए जो कुछ मिले ,
उसे " चाह " लेना ही ठीक है ।

जो कुछ सीखो , सब आ जाए,
ऐसा कभी नही होता है ।
इसलिए जो कुछ आ जाए ,
उससे ही " सीख " लेना ठीक है ।

जो कुछ लिखा है , वो सब पढ लिया हो ,
ऐसा कभी नही होता है ।
इसलिए जो कुछ पढ लिया हो ,
उसे ही " याद रख लेना " ठीक है ।

जो कुछ सुना , सब समझ लिया ,
ऐसा कभी नही होता है ।
इसलिए जो कुछ " समझा " ,
उसे ही " कर " लेना ठीक है।

जो कुछ बोला , सब काम का हो ,
जरूरी नही होता है ,
लेकिन बडों की कही हर बात को ,
शान्ति से " सुन " लेना ठीक है ।

जो कुछ खो गया , वो फ़िर से मिल जाए ,
ऐसा हमेशा नही होता है ,
इसलिए जो मिल गया ,
उसे ही " सहेज " लेना ठीक है ।

खुशी और गम , किसी के पास ज्यादा होते है ,
किसी के पास कम ,
इनको समान करने के लिए ,
आपस मे " बांट " देना ही ठीक है ।

किसी भी उम्र में कोई भी व्यक्ति ,
कभी परिपूर्ण नही होता है ,
इसलिए हर छोटे- बडे की कही बात पर ,
" ध्यान " देना ही ठीक है ।

कोई भी संस्कृति या धर्म ,
किसी को बुराई नही सिखाता ,
इसलिए हर धर्म और संस्कृति को ,
हमेशा " मान " देना ही ठीक है ।

Saturday, October 16, 2010

जय -जय माँ दुर्गा काली ......जय माता दी....................

लाल्लालाला ssssssssssssआ...लालालालाआssssssssssss ज़ूज़ूज़ूज़ूऊऊऊऊऊज़ूज़ूज़ूज़ूज़ूज़ू--हा हा हा हा

करना तो था श्री महिषासुर मर्दिनी स्त्रोत्र...................पर माईक काम नहीं कर रहा ......पहले रिकार्ड कर चुकी कोई प्रार्थना ढूंढी....................नहीं मिली.................मिला तो ये गीत.........उतना बुरा भी नहीं पर तब भी कोई मेहमान के आ जाने से बीच में रोकना पड़ा था...........पर ये तो अपना स्टाईल है .......यही सही......एक नया प्रयास..............हा हा हा......पर माईक ठीक होते ही पहले स्त्रोत्र......(या कहीं से जुगाड़ के (रचना या देवेन्द्र जिन्दाबाद) )..पक्का........
सारे ब्लॉगर साथियों और उनके परिवार को नवरात्री पर्व और दशहरे की शुभकामनाएं.............मेरी और मेरे परिवार की ओर से........ईश्वर सबको हमेशा खुश रखे इसी कामना के साथ ......सुनिये ये गीत (जैसा भी है ...)

 

Friday, October 8, 2010

चित्र वत्सल का.....गीत ललित शर्मा जी का और स्वर मेरा (अर्चना चावजी)

 ये गीत ललित शर्मा जी के ब्लॉग "शिल्पकार के मुख से" पर आप पढ़ सकते हैं।-(  इस ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री की किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं.)
 




 ललित जी का एक और गीत यहाँ सुन सकते हैं आप


Tuesday, October 5, 2010

मै , जब छोटी हो गई थी......आज फ़िर हो गई हूँ।

"अब तक अपने बच्चों को उंगली पकड़ कर यहाँ तक लाई हूँ,अब उन्होंने मेरी उंगली पकड़ ली है। पढ़ने के लिए दोनों बच्चे घर से दूर चले गए है, फ़ोन पर बातें होती रहती है, मगर जब बेटे से कहा कि जब तुम लोग यहाँ छुट्टियों में आते हो तो ऐसा लगता है कि  अब बहुत हो गया, मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना रहता है, मगर ज़रूरी बातों के अलावा कुछ कह ही नही पाती और तुम्हारे जाने का समय हो जाता है, तो उसने सुझाया- आप जो कहना चाहते हो उसे लिख दो।
मगर कैसे ? पूछने पर उसने ये ब्लॉग बना दिया |जब भी फ़ोन लगाती--पूछता लिखा की नही?  
मेरा जबाब होता-- लिखूंगी।
यहाँ तक कि फ़ोन लगाने के पहले ही डर लगने लगा कि फ़िर पूछेगा तो???? 

बेटी कहती हमें तो कुछ करने के लिये कैसे कहते हो अब आप करो तो !!!!|आखीर एक दिन तय कर ही लिया की आज तो कुछ न कुछ लिख ही दूंगी चाहे पसंद आए या न आए,पर अब जबसे कमेंट्स आने लगे (कभी कभी ) तो डर लगता है कि वे सब आगे भी पढ़ने की उम्मीद से कमेंट्स करते हैं। कल ही बेटे से कहा है -तूने मुझे मुसीबत में डाल दिया है तो हँसने लगा। .......तब तो उससे बोल दिया कि हंस ले, हंस ले मगर अब समझ में आ रहा है की बच्चे, माँ की उंगली छुडा कर क्यों भागते है!!!!!!!!!! (जबरदस्ती करवाती है न सब )"

पहले लिखी थी ४फ़रवरी२००९ को  ये पोस्ट कुछ इस तरह


आज वत्सल का जन्मदिन है, (समय हो गया ये लिखे उसे ) तो याद आई---(फ़िर से देखा और सुधारा बहुत गलतियाँ थी मेरी --हा हा हा )
और उसने भी तो नया किया है इसलिए


जन्मदिन की बधाई व शुभकामनाएं--ईश्वर तुम्हे वह सब दे जिसके तुम हकदार हो...आशीष

Monday, October 4, 2010

आज सिर्फ़ महफ़ूज़ के लिए------

अभी पाबला जी के ब्लॉग पर ये दुखद समाचार पढा---हम फ़िर साथ खेलेंगे ..
और याद आया ये गीत ....(और कुछ लिखने के लिए शब्द नही है आज )

Sunday, October 3, 2010

सही है

कागज बनता है बांस से ,
पानी का मोल है प्यास से,
चुभन होती है -फांस से,
उम्मीद बंधती है -आस से,
जीवन चलता है- साँस से,
जीवन में रस घुलता है -हास से,
कुछ रिश्ते होते है -ख़ास से,
खुशी होती है- अपनों के पास से,
और सम्बन्ध कायम रहते है
-- विश्वास से ।




अगर सुनना चाहे कुछ तो यहाँ सुने कुछ ----

१ ----न् दैन्यं न् पलायनम 

२ ---मिसफिट :सीधीबात 

३ ---आँख का पानी 

४ ---हिन्दी,मराठी,या गुजराती 

५ ---तिरंगा 

६---जगराता