Wednesday, December 15, 2010

>>>>>दीपक "मशाल"------पता नहीं क्या क्या

आज दीपक"मशाल"की एक गज़ल मेरी आवाज में----------उनके ब्लॉग की उदास फ़ोटो को समर्पित--

"मेरे घर की दीवालों ने बातें करना सीख लिया है ---यहाँ पूरी गज़ल पढ़ें

 

और ये कविता लिखी है चित्र देखने के बाद

शायद आप नहीं जानते वह गाते भी अच्छा है -----( गिफ़्ट दिया था मैनें --हा हा हा )-यहाँ पढे



एक गज़ल पहले भी सुन चुके हैं आप यहाँ
और हाँ पेंटींग भी करते है --देखियेगा उनके ब्लॉग मसि-कागद पर--सबसे  अंत में--

Tuesday, December 14, 2010

गीत फ़िरदौस का --स्वर मेरा--अर्चना चावजी

 एक गीत फ़िरदौस की डायरी से..



तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई
होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
राधा कुंज भवन में जैसे
सीता खड़ी हुई उपवन में
खड़ी हुई थी सदियों से मैं
थाल सजाकर मन-आंगन में
जाने कितनी सुबहें आईं, शाम हुई फिर रात हो गई
होंठ हिले तक नहीं, लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
तड़प रही थी मन की मीरा
महा मिलन के जल की प्यासी
प्रीतम तुम ही मेरे काबा
मेरी मथुरा, मेरी काशी
छुआ तुम्हारा हाथ, हथेली कल्प वृक्ष का पात हो गई
होंठ हिले तक नहीं, लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
रोम-रोम में होंठ तुम्हारे
टांक गए अनबूझ कहानी
तू मेरे गोकुल का कान्हा
मैं हूं तेरी राधा रानी
देह हुई वृंदावन, मन में सपनों की बरसात हो गई
होंठ हिले तक नहीं, लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
सोने जैसे दिवस हो गए
लगती हैं चांदी-सी रातें
सपने सूरज जैसे चमके
चन्दन वन-सी महकी रातें
मरना अब आसान, ज़िन्दगी प्यारी-सी सौगात ही गई
होंठ हिले तक नहीं, लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
-फ़िरदौस ख़ान

Monday, December 13, 2010

एक जरूरी संदेश......जनहित में जारी





डॉ.टी.एस. दराल जी के ब्लॉग से --------------एक ई- मेल का हिन्दी अनुवाद
अगर आप इसे औरों तक पहुँचाना चाहें तो प्लेयर को डाउनलोड करके अपने ब्लॉग पर लगा सकते हैं...
स्मॄति शेष----- एक भजन रचना की आवाज में

Friday, December 10, 2010

सुबह से दाँयी आँख फ़ड़क रही थी-----हो गया न उल्टा पुल्टा--

 

 ये सब हुआ उन्मुक्त जी के कारण --एक कठिन प्रयास...(संगीत के साथ गाना मेरे बस का नहीं )

Monday, December 6, 2010

इसमें बच्चे की क्या गलती ???



कल अचानक पहली कक्षा के बच्चों की क्लास लेने का मौका मिला। उनका एक टेस्ट लिया जाना था,चूंकि पेपर में प्रश्नों के सही उत्तर को, उनके जनरल नॉलेज के आधार पर भरना था मैने पेपर बच्चों को समझाना शुरू किया।प्रश्न स्वतंत्रता दिवस के बारे मे थे, और प्रश्न पढने के बाद जो उत्तर बच्चों ने दिये वो उनके जनरल नॉलेज के आधार पर सही थे।--


प्रश्न १-- भारत का नेशनल फ़ेस्टीवल (राष्ट्रीय त्यौहार) कब मनाते है ? (समझाया--जो सब लोग एक साथ मनाते है)
उत्तर मिला---भारत बंद......

प्रश्न२---कौनसे  दिन मनाते हैं?
उत्तर मिला---१३ अगस्त......(१५ को छुट्टी होने से १३ अगस्त को ही मना लिया गया था)

प्रश्न३---झंडा कहाँ फ़हराते हैं?
उत्तर मिला---स्टेज पर.....(फ़हराना का मतलब Hoist बताना पड़ा)

प्रश्न---कौन फ़हराता है ?
उत्तर मिला---प्रिंसीपल मेम...

प्रश्न---कितने रंग होते हैं?
उत्तर मिला---चार...केसरिया,सफ़ेद,सफ़ेद के बीच में नीला और हरा..........(हालांकि बच्चों को पता थाकि हमारे  झंडे को तिरंगा कहते है)...

Sunday, December 5, 2010

देखते ही देखते बदल जाते है-------

देखते ही देखते बदल जाते है-------
सड़क,शहर और लोग...
चीजें,जरूरते और भोग...
पैसा, ख्वाहिशे और अरमान...
घटना,गवाह और फ़रमान...
संबंध,नाते और रिश्ते...
इंसान,हैवान और फ़रिश्ते...

Saturday, December 4, 2010

कहाँ गए वो लोग ??? ...............याद आई एक कविता दिलीप की........




 

(सभी चित्र गूगल से साभार)
भुलाए नही भूलते वे दिन.......दिलीप के दिल की  कलम से .....


पहले यहाँ पोस्ट कर चुकी   -------यहाँ आप पढ़ भी सकते है।