Saturday, October 13, 2012

दिल दुखा है टूटा तो नहीं है ...

 सपनों के पीछे भाग रहे   इस लड़के अभिषेक कुमार के सारे सपने सच हों यही चाहती हूँ ...स्नेहाशीष के साथ ....
 अभि के ब्लॉग एहसास प्यार का से एक पोस्ट
तुम्हारे खत...
आवाज किसकी है, ये बताना जरूरी नहीं है...

Thursday, October 11, 2012

पाती...


नाम जो लिख कर ले जाती हवा मेरी पतिया
जाकर पहुंचाती मेरा संदेस,तुमसे कहती बतिया
द्वार खोले अब भी हर पल तकती हूं राह
देखकर सूना घर निकलती हैं बस आह
नहीं भाती अब मुझे भोर के सूरज की लाली
बहुत बैचेनी से कटती है राते काली -काली
नदी की तरह बहती सी जिन्दगी है अब मेरी
जाने कब किस ओर मुड जाए ये धारा उफ़नती.............

-अर्चना

Monday, October 8, 2012

सात भाषाएँ,सात गीत और एक मधुर धुन...एक बेहद साधारण पाठक की पसन्द के ...

एक बेहद साधारण  पाठक...  जिसकी अपनी पहचान है ...सबसे जुदा भीड़ में अलग-सा .......फ़िलहाल खुद अध्ययन में व्यस्त ...अभी बिना ब्लॉग वाला ब्लॉगर -क्यों कि उस पर आए प्रश्नों के उत्तर देने का समय नहीं मिलता उसे और बिना उत्तर दिये रह नहीं पाता ..आदत है......(आदत से तो सभी लाचार हैं यहाँ )     :-)
..और  जिसके अनुसार सुबह-सुबह बढ़िया नाश्ता पेट के लिए और संगीत मस्तिष्क के लिए जरूरी ...

जिसकी  यही बात अच्छी लगती है- सबसे अलग हट कर कुछ करने की smile
मुझे ‘दीदी’ कह देने पर उस पर अड़े रहना भी...:-)
तो सुनिए उसकी पसंद के सात गीत सात भाषाओं के
राजस्थानी 



तेलुगु



तमिल



हिंदी



बंगाली



अंग्रेजी


पंजाबी



अंत में आईरिश गीत की बाँसुरी पर धुन


Saturday, October 6, 2012

शाश्वत प्रेम...

हर तरफ़ बस तुम ही तुम ....ये ऐसा भाव है जो सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है .... आप भी महसूस कीजिए --
सलिल वर्मा जी की एक लघुकथा में --- मैं हूँ ना!



और अब एक गीत मेरे मन से ---तुम्हीं मेरे मन्दिर तुम्हीं मेरी पूजा
 


Wednesday, September 26, 2012

शायद ....गज़ल...

कभी जो राह तकते थे वो अब नश्तर से चुभते हैं
किताबों में रखे हैं फ़ूल वो अब खंजर से दिखते हैं...

हुई ये आँख भी गीली और उदासी का समन्दर है
अगर कोई जाम भी छलके तो आँसूओं से छलकते हैं...

कभी तुम लौट कर आओ इसी उम्मीद में अब भी
लौटती सांस से हरदम, बड़ी खुशियों से मिलते हैं...

न जाने कौन सा किस्सा, किताबों सा छपा दिल में
उसी की हर इबारत से, वो किस्मत को बदलते हैं...

-अर्चना 

Saturday, September 22, 2012

कोई चेहरा भूला सा ...

संजय अनेजा जी के ब्लॉग मो सम कौन कुटिल खल ......?से एक पोस्ट 

कोई चेहरा भूला सा
इस पोस्ट के बारें में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा सिर्फ़ सुना और महसूस किया जा सकता है --

जो भी प्लेयर चले दोनों में से -