Thursday, October 22, 2015

एक परंपरागत मीठा पकवान

हमारे यहाँ दशहरे पर पूरन पोळी बनाई जाती है ...आप भी सीखिए
पहले पूरण तैयार करें ऐसे -

चने की दाल को कुकर में बराबर से थोड़ा ज्यादा पानी डालकर 3 सीटी लेकर पका लें
दाल के बराबर मात्रा में शक्कर मिलाकर मिक्स कर लें
अब कढ़ाई में इसे माध्यम आँच पर पकाएं,ध्यान रखें खदकने पर उड़ता है ....हाथों पर गिरने से बचाएं
इसे इतना गाढ़ा करना है की थोड़ा ठंडा होते ही गोला बनने लगे......पका या नहीँ देखने का बढ़िया तरीका है कि सरिये को बीच में खड़ा करने पर अगर वो गिरे नहीं तो समझिए पक गया

आँच से उतार कर जायफल को कीस कर मिलाएं या चाहे तो इलायची पाउडर मिलाएं
हो गया पूरण तैयार....

अब गेहूं के आटे की लोई के बीच में भरकर रोटी सेंक लें ....आटे में थोड़ा मोयन डालें तो रोटी खस्ता बनती है ....चुटकी भर नमक भी स्वाद के लिए डाल सकते हैं.....
....
तवे से निकाल कर घी लगाकर परोसें......कढ़ी के साथ स्वाद हमेशा याद रहेगा .....

3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-10-2015) को "क्या रावण सचमुच मे मर गया" (चर्चा अंक-2139) (चर्चा अंक-2136) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kavita Rawat said...

मुझे भी बहुत अच्छी लगती है पूरन पोळी .. ..तीज त्यौहार में बन जाती हैं लेकिन कढ़ी के साथ अभी तक तो नहीं खाया लेकिन आपने कहा है तो देखते हैं ..
प्रस्तुति हेतु आभार!

राजेंद्र कुमार said...

बेहतरीन प्रस्तुति, आभार आपका।