Wednesday, August 29, 2018

बुआ ने किया ऐलान

दादी से आगे भी एक पायदान होती है उसी पर चढ़ी बैठी हूँ-दादी माँ की 😂
दोनों परियों को नाम मिल गया अपना ,बड़ी है- "यज्ञा" और छोटी है-"यशी" ..बुआ ने ऐलान किया -
बड़ी एक मिनिट बड़ी,और छोटी एक मिनिट छोटी ...
एक साथ उठना, सोना,खाना चलता है,एक माँ की गोद में होती है एक दादी माँ की 😂
अभी तो पहचानने के लिए एक धागा बाँधना पड़ा है बड़ी को 😂😂
मायरा को एक दिखती है तो तुरंत कहती है दूसरी दिखाओ 😂

#नयाअध्यायअनवरतचलनेवालीकहानीका

और नाम पसंद आये ,तो आशीष देना न भूलें हमको कहने को कहा है -यज्ञा,यशी ने 💃💃 

बुआ का ऐलान-

I am more than happy to announce the names by which both our little angels will be called for their coming bright life. "यज्ञा" (बड़ी) 👼🏻"यशी" ( छुटकी)👼🏻 We wish for your bright future, lots of tantrums and happiness always.. Love you💞


Tuesday, July 24, 2018

बीते हुए लम्हे


आज २४ जुलाई फिर से सामने आ खड़ी हुई है -कुछ याद चित्रों के सहारे 

















Monday, July 16, 2018

पटना यात्रा - एक याद

पटना ...
इस शहर में सुबह जल्दी हो जाती है, 5 बजे ही बहुत उजाला हो जाता है ..पास ही धोबी घाट है, 5-6 भाइयों के परिवार इस काम को मिलकर करते हैं, सुबह 6 बजते ही सब अपना काम शुरू कर देते हैं, अलग-अलग टंकियां बनी हुई है और हर टंकी के पास एक तिरछा पत्थर लगा हुआ है-



 सारे पुरुष अलग-अलग कपड़े धोते हैं,किसी के पास चादरों का ढेर होता है तो किसी के पास साड़ियों का,कोई छोटे कपड़े धोता है तो कोई नाजुक ....बुजुर्ग महिलाएं कपड़े सूखने डालने का काम करती हैं ,बाकि कम उम्र की महिलाएं,जो बहू,बेटियां हो सकती हैं,कपड़े भिगोने और पानी इधर-उधर करते दिखती हैं।





इनके घर वैसे ही हैं अब तक जबकि आसपास मल्टियाँ बन गईं... मैं जिस बिल्डिंग से इन्हें देख रही हूँ वही 30 साल की हो चुकी है ....



इस परिवार के बारे में पता चला कि पहले माता-पिता ये काम करते थे,अब सारे भाईयों का परिवार करता है, पहले साथ थे अब यहीं पास-पास घर बंट गए...अब इनके बच्चे इंजीनियर बन चुके,लेकिन ये अपना यही काम करते हैं,यहीं रहते हैं,यहां से गंगा घाट ज्यादा दूर नहीं एक-डेढ़ किलोमीटर होगा.. यानि जिस समय ये बसे होंगे गंगा का किनारा दिखता होगा ...


 अब कोचिंग रूपी कुकुरमुत्तों ने सारी जगह को घेर रखा है ..



.घर से बाहर निकलें तो हर तरफ बच्चे ही बच्चे दिखते हैं....और दूर तक चारों तरफ कोचिंग क्लास के विज्ञापन .... इतनी बहुतायत में मैंने अब तक नहीं देखे ...
कोचिंग के बारे में कहते हैं-यहां हर भाव में शिक्षक उपलब्ध हैं,बिजनेस है कोचिंग क्लासेस ....
एक बहुत अच्छी बात ये लगी कि पढ़ने का जूनून यहां दिखता है ... रिक्शेवाला ,ड्राईवर से लेकर दुकानदार और खाने का ठेला लगाने वाले का बच्चा किसी न किसी परीक्षा की तैयारी में जुटा है ....
जूस पीने एक जगह रूके तो वो बच्चा था 12 वीं में सुबह कोचिंग जाता है,शाम को जूस बेचता है....

ड्राईवर भैया गोप जी के बेटे ने इसी वर्ष बारहवीं दी,वे बताते हैं -  11 वीं से पटना ले आये गांव से ,कोचिंग डलवाये ,पहली ही बार में जे ई ई एडवांस निकाल लिया,और स्टेट रैंकिंग 3 हजार से कम है,अच्छा कॉलेज मिल जाएगा,लेकिन बेटा को डिफेंस में जाना है ,तो यहां उसकी कोचिंग लेगा अब ... 6 महीने में परीक्षा देगा ...फिट रहने को पास के पार्क में दौड़ता है सुबह...
सुनकर पिता की आंखों में तैरते सपने को देख सकते हैं हम...वे कहते हैं-बेटी दसवीं में है,गांव में है अभी ....वो भी टॉप करेगी ..
....ईश्वर सबके सपने पूरे करे ....
सुखद संयोग कि पिछले दिनों मैंने  भाभी,पल्लवी और मायरा के साथ पटना स्थित शक्तिपीठ "पटनदेवी" के दर्शन किये,यहां सती की दाईं जंघा गिरी थी,दीवार पर यही कहानी लिखी हुई है जो आपने बताई शिव द्वारा शव लेकर घूमना और विष्णुजी द्वारा 52 टुकड़े करना .... मंदिर एकदम संकरी गली में स्थित है ,बहुत छोटा सा मंदिर और बिलकुल लगे लगे ऊंचे मकानों से घिरा है पार्किंग की बहुत सीमित जगह ,पूजापे प्रसाद की दुकान वाले ही एक एक गाड़ी खड़ी करवा लेते हैं हम 1:50 पर दोपहर में पहुंचे ,मंदिर के गर्भद्वार पर ताला लगा था,पूछने पर पता चला 2 बजे खुलेगा, कुछ नव विवाहित जोड़े पूजा के लिए परिवार सहित आये थे ,जैसे ही 2 बजे एक पंडित जी ने लाईन में लगने वाली जगह का ताला खोला और सब तुरंत पंक्तिबद्ध हो गए गर्भद्वार का ताला खोलने दूसरे पंडित जी आये मुझसे आगे एक नवविवाहित जोड़ा था ,उन्होंने फूल और प्रसाद की टोकनी दुल्हन द्वारा आगे बढ़ाई ,पंडित जी ने पूछा  शादी हुई है उनके साथ आई बहन ने हाँ कहा पंडित जी ने कहा साड़ी चढ़ानी चाहिए,लेकिन बहन ने कहा जितना बना उतना किया और प्रणाम करवा कर आगे चली ,मैंने और मायरा ने माथा टेका और आगे बढ़े पीछे भी नवजोड़ा था उनकी टोकरी में साड़ी भी थी ,पंडित जी ने उनसे कहा साड़ी ले जानी है वे बोले हाँ ,तो पंडित जी बोले 51 रूपये रखिये ....
मंदिर में शांति थी , शक्ति पाठ भी हो रहा था पीछे लेकिन 10 मिनट में दर्शन कर बाहर आ गए थे कोई भीड़ नहीं थी ..


 इससे पहले हरमंदिर साहिब गए थे वहां से यहां का रास्ता बहुत भीड़ भरा और संकरा था ,पुराना पटना शहर है ये एरिया .--









Friday, June 29, 2018

रेलयात्रा में चोरी,दानापुर,पटना,बिहार

बहुत दुखी मन से घटना लिख रही हूं,जो हुआ वो किसी के साथ न हो, जरूर कोई पुण्य आड़े आया होगा जो जान बची वरना चलती ट्रेन से एक महिला के गिरने की खबर भर होती मैं .......इस घटना ने बिहार के प्रति मेरे विश्वास की धज्जियां उड़ा दी ....
हुआ ये की मैं,भाभी,बेटी और मायरा के साथ मुम्बई-आसनसोल के ए सी थर्ड क्लास के बी वन कोच में सफर कर रहे थे ,खंडवा से पटना तक ....
पूरा सफर अच्छा रहा,आप सबसे शेयर भी करती रही मायरा की शैतानियां...
और सबसे अहं लाइव लोकेशन शेयर करने की जानकारी भी बातचीत के दौरान दी ...कुछ दोस्तों ने सीखा भी ...
दानापुर से गाड़ी धीमी हो गई,बीच में दो बार रूक भी गई पटना उतरने  वाले साथ के लोग दरवाजे पर आने लगे,हमने भी पूछा-आ गया क्या?जबाब मिला जी 5 मिनिट में,चूंकि हमारे साथ कोई पुरुष नहीं था ,हम अपना सामान गेट पर ले आये ,मायरा सो रही थी ,बेटी उसे गोद में लेकर पहले कंपार्टमेंट तक आ गई,अब मैं और भाभी बाहर थे AC के अपने बेग और हैंडबैग और पर्स के साथ,तभी हमारे साथ एक हादसा हो गया ,पटना उतरने से पहले एक चोर गिरोह से सामना हुआ... जान बची लाखों पाए समझिये
[वे 7-8 लोग थे 25 से 30 उम्र के,गेट पर सामान लेकर उतारने को तैयार खड़े थे हम,तभी अचानक दानापुर से धीमी चलती ट्रेन में वे आए हमें गेट से हटने को कहा, मुझे और भाभी को लगा उन्हें यहीं उतरना होगा तो हमने रास्ता दिया उन्होंने गेट खोल दिया मुझे आगे की ओर हटाया और हमारे 3 बेग जो रास्ते में थे उठाकर टॉयलेट के पैसेज में सरका दिए,3 लोग बेग के आगे खड़े हो गए हमें बेग दिखाई नहीं दे रहे थे तभी मैंने पूछा यहीं उतरना है क्या ,वे बोले पटना ,तो मैने कहा जब हमें भी यहीं उतरना है तो क्या फर्क पड़ता है आप पहले उतरें या हम ?अगर हम ही उतर जाते तो क्या होता ,हम तो यहां के मेहमान हैं,आप तो यहीं के लोग हैं, वे पीछे हट गए...साथ की महिला को भी आगे निकाल दिया ,
इस बीच मैं भाभी से कहती रही कि हमारे बेग दिख नहीं रहे, हमारे साथ आये एक दंपत्ति भी वहीं उतरने वाले थे उनमें से पुरुष ने कहा आप टेंशन न लें मैं आपके बेग दे दूंगा ,लेकिन तब बेग उन्हें भी न दिख रहे होंगे उनका भी एक बेग सरकाया था...
. इस बीच उनमें से एक ने पूछा आप कहाँ से आये?मैंने एम.पी. बताया ,बोले यहाँ? मैंने कहा यहाँ की बेटी है हमारी बहू,बल्कि अब बेटी ही है बहू क्या?..उसने हमारा एक बेग वापस आगे की ओर करके रख दिया
पूछे -होटल वगैरह में रूकियेगा? मैंने कहा-नहीं घर है..
तभी भाभी ने कहा-अब हमारे बेग आपने पीछे किये तो आप ही मदद कीजियेगा उतारने में ...जी..जी.. जबाब मिला .. तभी अंदर की ओर से 2 लड़के आये हमें क्रॉस कर दूसरी ओर जाने को हमने उनसे कहा-आप अभी वहीं रुकिए जगह नहीं है बाद में जाईयेगा, इतनी बातचीत सुन बेटी भी मायरा को गोद में लेकर बाहर आ गई, तब इधर के वे 3 लड़के जो पीछे टॉयलेट की ओर थे आगे निकलकर AC कोच के अंदर दूसरे गेट की तरफ हमें किसी तरह क्रॉस करते चले गए ,अब इधर जगह बन जाने से आगे वाले 1 को छोड़ बाकि 2 भी AC कोच के दूसरे गेट की ओर चले गए , जैसे ही ट्रेन रूकने को हुई पहला वाला भी तेजी से अंदर चला गया, हमें आश्चर्य हुआ ,मैंने कहा -जब यहां से उतरना ही नहीं था तो बेग इधर उधर हड़बड़ी क्यों मचाई ? ट्रेन अभी भी धीमी थी  तभी ये सुनकर एक अन्य लड़का जो था बिहार का था भोपाल में जॉब कर रहा था हमारा सहयात्री बोला यही होता है यहां आकर ट्रेन भी लेट होती है ...मैंने कहा यही बेसिक फर्क है,हमारे इधर अगर मदद का कहा तो बिना उतारे नहीं जाते लोग वो बोला जी बिलकुल यही अनुभव हुआ है ,साथ के दंपत्ति जो इंदौर से बाढ़ जॉब के लिए आये थे उन्होंने भी हामी भरी और इतने में ट्रेन प्लेटफार्म पर रुकी, हम उतरे जो हमारे सहयात्री थे उन्होंने हमारे बेग हाथ में पकड़ाए ..

हमें रिसीव करने आये भाई साहब सामने ही खड़े थे हालांकि पहली बार मिल रहे थे लेकिन पल्लवी को देखते हुए ही "रानू" कह आगे आ गए  हम उनके साथ निकल आये बाहर ...

हमें तो घटना का पता घर आकर लगा,बेग से सामान चोरी हो गया,
बेग बाहर से वैसे ही थे,बंद ,बल्कि मेरे बेग में ताला भी लगा था
लेकिन जब ताला खोला तो सारे कपड़े अस्त व्यस्त
ऊपर - नीचे और ढक्कन के साइड की जाली फटी हुई,उस ओर रखे गिफ्ट के खाली लिफाफे भी कपड़ों की तरफ ढूंसे हुए,कपड़े भी गोल- गोल रोल कर ढूंसे हुए
सिर्फ एक साड़ी जो मैंने नेहा के लिए गिफ्ट करने को ली ,वो गायब, जो ऊपर रखी थी, बाकी कुछ नहीं गया
,लेकिन जो सामान मेरे बेग में था वो पल्लवी के बेग से निकला
[😰😰😰 पैसे कार्ड सब हमारे साथ पर्स में थे तो बच गए ,शायद उन दो पुरुषों की वजह से हमारे पर्स छीनने की कोशिश नहीं की वरना हमें धकेलते हुए खुले गेट से बाहर फेंक देते .. बस यही हो सकता था मैं गेट पर ही थी 🙄 और अखबार की खबर आप पढ़ रहे होते अगले दिन ....😢

कहाँ और कैसे हुआ होगा सोचते ही पूरा घटनाक्रम आंखों में घूम गया उनमें से 3 के चेहरे अब भी दिख रहे हैं,स्कैच बनाने की कोशिश भी करूँगी ...😊

आप सबको बताकर हल्का हो जाऊंगी सोचकर संस्मरण लिखा ही दिया 🙌😘 कोशिश में हूँ संयत होने की.... दहशत के कारण नींद नहीं आई  है,सो ... तकलीफ हो रही है,मायरा के भविष्य को लेकर भी चिंतित हूँ....
जान बची लाखों पाए ...यहां चरितार्थ हुआ ,

लौट के बुद्धू घर को आये की कहानी भी इसी यात्रा में हुई तो उसे भी लिखूंगी ....आपको पोस्ट पढ़कर दुख हुआ होगा तो खुश करने का जिम्मा भी मेरा होगा ,बताऊँगी रेलवे के कारण हद्द की हद्द की भी कहानी ....👍👍👍थ्री चियर्स फ़ॉर #स्त्रीसुरक्षा और #रेलवे #दानापुरपटना...

Sunday, April 8, 2018

लोकतांत्रिक बाबा


बच्चा छोटा हो तो सबसे पहले बोलने की कोशिश में म के बाद ब शब्द ही बोलता है,म से मां, मामा आगे बढ़ता है,और ब से बा और बाबा ... तब बाबा घरेलू न्याय किया करते थे ...
मामा से डर नहीं लगता मगर बाबा शुरू से डराने की कैटेगरी में शामिल हो जाते हैं ...
बाबा .....साधू बाबा ..को देख देख कर बड़े होते हुए हम अब ...स्वतंत्र लोकतंत्र  में लोकतांत्रिक बाबा से डरने लगे हैं ...डरें भी क्यों नहीं ..बड़ी साधना करते हैं ये साधन जुटाने में ......
.इनके दिन ब दिन कारनामें,चमत्कार से कोई काम होते हैं क्या? किसी को अंदर-बाहर करते करते किसी को कब गायब कर देते हैं कोई कभी जान नहीं पाया अब तक .....इनका पावर सदा बढ़ता हुआ ही प्रतीत होता है ...जितने भी पुराने बाबा होते जाते हैं अपने चेले चपाटों को अपनी थोड़ी थोड़ी पावर बाँटते रहते हैं ,हालांकि ये भी उतना ही सच है कि यही चेले चपाटे एक दिन अपने बाबा को रौंदते हुए ऊपर कूच कर जाते हैं फिर अंत बड़ा दर्दीला हो जाता रहा है ऐसे लोकतांत्रिक बाबाओं का ....
राम भरोसे रहने वाले इन बाबाओं के नामों में कभी राम आगे तो कभी पीछे जुड़ा रहता है कभी कभी राम अपने साथी रहीम को भी जोड़ लेते हैं  कभी देव को ...लोगों को ये राम राम करवाते रहते हैं जाने कितने अपनी रामरोटी इनके भरोसे सेकते हैं ....आशा रहती है राम सब भला करेंगे पर न आशा बचती न आशाराम ...रोटी सेकते हुए ....
फिर लोकतंत्र में जो जाने लोक के तंत्र का मंत्र वो बाबाओं की अलग केटेगरी को प्राप्त कर लेता है यानि मंत्री कहलाता है ...इनके दिमागी फितूर भी बाबाओं से बीसा ही होते हैं  .... अब लोकतांत्रिक बाबाओं का जमाना आ गया है ....न राम रहे न रहीम न कोई  साधू न बापू.....
न न्याय न न्यायपालिका,न साध्वी न साधिका ....
अब बचा है बस डर जनता के दिल में ....
लोकतंत्र भी लोकतांत्रिक बाबाओं की चपेट में हैं .....
हम भी जपें या कहें राम राम ,आप भी जपें या कहें राम-राम ....
#व्यंग्यकीजुगलबन्दी

Thursday, March 15, 2018

दो कथाएँ

1-

चिन्दी

अरे ओ चिन्दी.... इधर तो आ......
जोर जोर से आवाज लगा रहे थे....अस्पताल के वार्ड में उसको.....और चिन्दी है कि ये उड़ी और वो उड़ी फिर रही थी हर मरीज के बिस्तर के पास.....सॉकेट में मच्छर भगाने की टिक्की डालने को....
पुनम्मा नर्स के साथ ये काम करने में बहुत खुश हो जाती है वो.......
घूड़े के ढेर पर चिथड़ों में  लिपटी मिली थी 3 साल पहले.....तब से यही नाम पड़ गया.......चिन्दी....पुनम्मा की पूँछ......चिन्दी!

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2-

नई सुबह

वो आज फिर पन्नी उठाए घूम रहा था...स्कूल की यूनिफॉर्म पहने......
मुझे देखते ही बोल पड़ा ......जा रहा था स्कूल, मगर रात बहुत चढ़ा के आया बाबा......माँ को बहुत पीटा....अब दोपहर तक सोया पड़ा रहेगा........माँ के पैर में दर्द है और आज काम पे नहीं जा पाएगी.....
एक टैम खाना भी तो डालनाइच् पड़ेगा न पेट में.......
और मैं मांगे पैसे की नहीं खाऊंगा रोटी........
.
.
बाय कहा मैंने ...कल फिर मिलेगा...
नई सुबह तो होगी ही......

Tuesday, January 23, 2018

कुछ प्रश्न जो किये गए मुझसे ,उनके उत्तर मेरे

प्र. 1) आपका ब्लॉगिंग के प्रति रूझान कैसे पैदा हुआ, पहली बार आपने ब्लॉगिंग कब की? 

उत्तर – जब मेरे बच्चे बड़े होकर इंदौर से बाहर पढ़ने चले गए तो स्कूल से आकार बहुत खालीपन लगता था , समय बहुत होता था ।टी. वी. देखने में रूची नहीं रहीं ,नेट नया-नया था जीमेल पर चेट करना सीखा था ,छुट्टियों में जब बच्चे घर आते तो कहती कि –इतनी सारी बातें रहती है तुम लोगों को बताने की मगर तुम्हारी छुट्टियाँ ही खतम हो जाती है,समय ही नहीं बचता सामान्य कामों के बीच ,मेरे छोटी बहन रचना बजाज तब लिखती थी,उसने तो 2006 में ही बना लिया था, और उसका ब्लॉग हम पढ़ते थे ... मैं भी कुछ लिखने कि कोशिश करने लगी थी कॉपी में .....बेटे ने तब खुद का चित्रों वाला ब्लॉग बना लिया था कहा- आपका भी एक ब्लॉग बना देता हूँ ,आप जो भी लिखना हो उस पर लिख दिया करो, और बस ये ब्लॉग बन गया –मेरे मन  की । 2008 में ...

प्र. 2) भाषा, अभिव्यक्ति व प्रतिक्रियाओं की दृष्टि से ब्लॉगिंग करने का आपका प्रथम अनुभव कैसा रहा? 

उत्तर – भाषा बोलचाल की है तो लिखने में कोई परेशानी नहीं थी।जो मन में आता है वही लिखना था, तो बहुत अच्छा और आसान लगा ,प्रतिक्रियाएँ भी प्रोत्साहित ही करती थी ... बढ़िया अब तक

प्र. 3) आपको पहली बार ब्लॉग पोस्ट पर हिंदी टाइप करने में किस प्रकार की समस्या आई और उस समस्या का समाधान आपको कहाँ से मिला? 

उत्तर- जैसा कि बताया मेरे छोटी बहन लिखती थी तो उसने बता दिया था बारहा के बारे में ।तभी से उसका ही प्रयोग करती हूं , कोई समस्या नहीं रही ...अब तो गूगल हिन्दी इनपुट भी आसान है ...

प्र. 4) ब्लॉगिंग में ऐसी क्या खास बात है, जो आप इसे अभिव्यक्ति के अन्य माध्यमों से बेहतर मानते हैं?

उत्तर- कोई समय की पाबंदी नहीं , लेखन सीमा की पाबंदी नहीं ,जब मन हो,जैसा मन हो खुद को व्यक्त कर सकते हैं ....मन की बात ड्राफ्ट के रूप में सहेज सकते हैं,श्युडूल कर सकते हैं,लेबल कर सकते हैं , टेक्स्ट,फोटो ,वीडियो,audio कुछ भी तरीके से खुद को व्यक्त कर सकते हैं , हालांकि अब भी एमपी3 सीधे अपलोड की सुविधा नहीं है ...और फेसबुक से पहले ब्लॉग बनाया तो वही अब भी बढ़िया है |

प्र. 5) आप किस प्रकार के ब्लॉग लिखते है। आपके ब्लॉग के विषय व सामग्री के बारे में कुछ बताए?

उत्तर- मैं जो मन में आता है वही अपने ब्लॉग पर पोस्ट कर देती हूं ,चाहे संस्मरण हो,चाहे,दो लाईन .कहानी,या कविता ...मेरा ब्लॉग विषय आधारित नहीं है , सब विधाओं कि अभिव्यक्ति है, बहुत प्रयोग किए .....मैंने पॉडकास्ट पोस्ट किए जो बहुत पसंद किए गए ..... बाकी आप देख सकते हैं- “मेरे मन  की ”पर 

प्र. 6) आपके पसंदीदा प्रमुख ब्लॉग कौन-कौन से और क्यों है?

उत्तर- बहुत से ब्लॉग हैं जिन्हें पसंद करती हूं ,नाम गिनाए नहीं जा सकते ,कोई एक कभी भी हमेशा पसंद रहा ऐसा नहीं  ,जो मेरे रूची से मेल रखते हैं – गीत-संगीत ,कहानी,कविताओं ,औडियो ब्लॉग और विज्ञान की जानकारी वाले ब्लॉग पसंद हैं ...

प्र. 7) एक ब्लॉगर होने के नाते पाठकों की प्रतिक्रियाओं पर आपका उनसे संवाद किस तरह का होता है? 

उत्तर-मैंने बहुत पहले ही ब्लॉग बनाया है ,प्रतिक्रियाएँ पढ़कर संवाद हो ऐसी स्थिती आई नहीं ....लेकिन उनसे मेल या चेट के माध्यम से संवाद हुआ /होता है .....

प्र. 8) क्या आपको लगता है कि अश्लीलता, सांप्रदायिकता व फूहड़ता की भेंट चढ़ने से बचाने के लिए ब्लॉंग पर भी किसी प्रकार का नियंत्रण होना जरूरी है?  

उत्तर-ब्लॉग अभिव्यक्ति कि स्वतन्त्रता का एक सशक्त माध्यम है .... ये व्यक्ति को स्वनिर्णय लेना होता है कि वो सबके साथ किस तरह से व्यक्त हो रहा है .... अगर एक मंच हो जिसपर सारे ब्लॉग आपस में जुड़े हों तभी नज़र रखने व नियंत्रण रखने की बात आती है .... ब्लॉक करने जैसा ऑप्शन हो तो रोक लगाने में आसानी हो सकती है .... अगर बेहतर कल की कल्पना है तो होना चाहिए |

प्र. 9) हिंदी भाषा व साहित्य के विकास में ब्लॉग का क्या योगदान है?

उत्तर – बहुत आसानी से बहुत सा साहित्य उपलब्ध हो रहा है हिन्दी में , लोग आपस में जुड़ रहे हैं ।हिन्दी भाषा आधारित ब्लॉग भी बने हैं .... खासकर ऐसे ब्लॉग हैं जहां लेखकों का कृतित्व आसानी से पढ़ने को उपलब्ध है ....प्रसार तो हुआ है |

प्र. 10) क्या कारण है कि अधिकांश हिंदी ब्लॉग अधिकतम तीन या चार वर्षों में ही आए-गए हो जाते हैं? 

उत्तर –आए-गए से क्या मतलब है ? लेखन सामग्री तो वहीं हैं ,फिर भी एक ऐसा मंच हो जहां ब्लॉग पोस्ट के प्रकाशन कि सूचना तुरंत उपलब्ध हो तो शायद सबको ब्लॉग तक पहुँचने में आसानी हो ... जैसे ब्लॉगवाणी था …

प्र. 11) क्या पत्रकारिता की तरह ब्लॉगिंग में भी कॅरियर निर्माण की संभावनाएँ है। इस बारे में कुछ बताएं? 

उत्तर – जिस तरह  पत्रकारिता होने लगी है उसे देखकर तो तो कैरियर निर्माण जैसा कुछ लगता नहीं ..... हां ब्लॉगिंग में कैरियर निर्माण की संभावनाएं असीम है :-)

 प्र. 12 ) हिंदी के साथ-साथ आंचलिक भाषाओं के ब्लॉग का आप क्या भविष्य देखते हैं?

उत्तर – आंचलिक भाषा के ब्लॉग अपनी संकृति सहेजने का बेहतर माध्यम हैं .... आने वाले समय में बहुत जानकारी एकत्रित मिलेगी रोटी कमाने के लिए अपने अंचल से दूर जा बसे लोगों को अपनी पीढ़ियों को बताने को ,अपनी जड़ों से जुडने को ....

प्र. 13) हिंदी ब्लॉगिंग के भविष्य के बारे में आपका क्या कहना है? 

उत्तर – बहुत ब्लॉग बन रहे हैं , लोग लिखना सीख रहे हैं , खुद को व्यक्त कर पा रहे हैं ...घरेलू महिलाएं भी आगे आकर खुद को व्यक्त कर पा रही है , बेहतर ही है ...कल से बेहतर आज है ,आज से ज्यादा बेहतर आनेवाला कल होगा  

प्र. 14) आपकी राय में ब्लॉग की सबसे बड़ी खूबी व सबसे बड़ी खामी क्या है?

उत्तर – अपनी बात अपनी भाषा ,में कह पाना इसकी खूबी है , खामी ये कि सारे ब्लॉग के लिए एक ही मंच का न होना .... 

प्र. 15) हिंदी ब्लॉगों को प्रचारित करने व बेहतर बनाने के लिए आपके तीन प्रमुख सुझाव क्या है? 

उत्तर- 1-जो लोग लिख रहे हैं ,सतत लिखें, अपने ब्लॉग में पसंदीदा ब्लॉगरोल रखें, सबसे ज्यादा समाज के लिए उपयोगी लिखें तो लोग आपको पसंद करते ही हैं .....

2-मेरे ब्लॉग पोस्ट प्रकाशित होते ही फेसबुक पर औटोमेटिक लिंक पोस्ट होती है,.वैसे सारे ब्लॉग जुड़े हों कई सारी साइट्स से 

3- और बेहतर बनाने के लिए मुझे औडियो सीधे पोस्ट करने की सुविधा चाहिए ... 

प्र. 16) एक ब्लॉगर होने के नाते आप नवोदित और स्थापित ब्लॉगरों को क्या संदेश देना चा‍हते हैं?  

उत्तर – स्थापितों को तो यही की –आपसे ही नवोदित लिखना सीख रहे हैं ,तो ब्लॉग पर लिखना जारी रखें ,अनुभव साझा करें  और नयों को प्रोत्साहन दें .... और नवोदितों को ये कि लिखने से पहले बहुत सा पढ़ें ..... प्रतिक्रियाओं को हमेशा सम्मान दें और सही उत्तर.... भाषा सदैव सब उम्र के पठन योग्य रखें... और समाज को कुछ बेहतर बनाने के लिए ब्लॉग का उपयोग करें |